भारतीय पर्वतारोही और भारतीय पर्वतारोहण संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी चेतन पांडे की अंतिम संस्कार के दौरान विश्वनाथ घाट पर मौजूद लोग।
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नंदादेवी ईस्ट चोटी में पर्वतारोहण करने गए विदेशी पर्वतारोहियों के दल में एकमात्र भारतीय पर्वतारोही और भारतीय पर्वतारोहण संस्थान
के जनसंपर्क अधिकारी चेतन पांडे का शव बृहस्पतिवार तड़के उनके लक्ष्मेश्वर स्थित घर में लाया गया। शव के पहुंचते ही घर पर कोहराम मच गया। उनकी माता को संभालना मुश्किल हो गया। बाद में उनके शव का विश्वनाथ घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया।
बता दें कि जाने माने पर्वतारोही चेतन पांडे (36) के अलावा चार ब्रिटिश, दो अमेरिकी और एक आस्ट्रेलियन पर्वतारोहियों समेत आठ पर्वतारोहियों की नंदादेवी ईस्ट के पर्वतारोहण के दौरान एवलांच के चपेट में आने से मौत हो गई थी। डेयरडेविल्स अभियान के तहत उनके शव खोजने का काम शुरू हुआ और बुधवार को सभी पर्वतारोहियों के शवों को हेलीकाप्टर से हल्द्वानी पहुंचाया गया। इस दल में शामिल एकमात्र भारतीय और पर्वतारोहण संस्थान नई दिल्ली के अधिकारी चेतन पांडे अल्मोड़ा के लक्ष्मेश्वर के रहने वाले थे। बृहस्पतिवार सुबह उनका शव हल्द्वानी से अल्मोड़ा लाया गया। शव के पहुंचते ही घर पर कोहराम मच गया। उनकी माता कमला पांडे को संभालना मुश्किल हो गया। उनके हाथों से बमुश्किल शव यात्रा से पहले होने वाले संस्कारों को करवाया गया। उनके पिता बंशीधर पांडे, भाई हिमांशु और सौरभ पांडे किसी तरह शांत रहकर खुद को संभाल रहे थे। पत्नी मानसी को भी कुछ लोग एक कमरे में सांत्वना देकर संभाले रहे। बाद में विश्वनाथ घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे पहले विधानसभा उपाध्यक्ष और विधायक रघुनाथ सिंह चौहान, पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, पूर्व दर्जा मंत्री बिट्टू कर्नाटक, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह पिलख्वाल, एसडीएम सीमा विश्वकर्मा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी, पूर्व सभासद अशोक पांडे, त्रिलोचन जोशी आदि ने परिजनों को सांत्वना दी।
पालतू कुत्ता भी पहचान गया मृत चेतन को
अल्मोड़ा। शव के घर पहुंचने पर घर दोनों पालतू कुत्तों में से एक शव की तरफ पहुंचकर गौर निहारने लगा। मानो वह चेतन को पहचान गया हो। चेतन के भाई हिमांशु ने बताया कि चेतन ट्रैकिंग के दौरान हिमालय क्षेत्र के किसी गांव से इन दोनों कुत्तों को लाए थे। दोनों कुत्ते चेतन को काफी प्यार करते थे। ब्यूरो