जागेश्वर (अल्मोड़ा)। भनोली तहसील अंतर्गत 11 गांवों के लिए 8.54 करोड़ की लागत से गैराड़ पंंपिंग पेयजल योजना बनी, लेकिन लंबा वक्त गुजरने के बाद भी इससे जुड़े गांवों के लोग योजना से लाभान्वित नहीं हो सके हैं। पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीण जलस्रोतों से पानी जुटाने को मजबूर हैं।
तहसील के गैराड़ मल्ला, घुरकना, मटकन्या, अंडोली, गुरड़ाबांज, काना, नैकिना, बानीतोला, धनमन, आरतोला, खोला व सहकांडे आदि गांवों के करीब 650 परिवारों के लिए 8.54 करोड़ की लागत से बीते वर्ष गैराड़ पंपिंग पेयजल योजना अस्तित्व में आई। योजना बनने के बाद भी ग्रामीण पेयजल का इंतजार कर रहे हैं। एक ओर ग्रामीण पानी के संकट से जूझ रहे हैं और दूसरी ओर करोड़ों की पेयजल योजना अब तक सफेद हाथी बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि काफी समय बीत गया, इसके बाद भी जल संस्थान आए दिन ट्रायल की बात तक ही सीमित है। ट्रायल में भी पानी कभी लाल, कभी मटमैला तो कभी हरे रंग का आ रहा है। वह काफी समय से योजना से पेयजलापूर्ति करने की मांग कर रहे हैं, परंतु जल संस्थान चुप्पी साधे हुए है और स्थिति जस की तस बनी हुई है।
योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायतें मिल रही हैं और ट्रायल में पानी अशुद्ध बताया जा रहा है। इस बारे में संबंधित विभाग के अधिकारियों से वार्ता की जाएगी।
— बरखा जलाल, तहसीलदार, भनोली
योजना लगभग बन चुकी है, कहीं सिविल वर्क हो रहा है। पेयजलापूर्ति के लिए ट्रायल जारी हैं। एक बार पूरी पेयजल लाइन चेक की जाएगी। जल्द पानी की आपूर्ति की जाएगी।
— शुभम बेलवाल, जेई, जल संस्थान