पौष माह की बैसी का बड़ा महत्व होता है, चौबटिया के देहोली गांव की धूंणी में भी बैसी शुरू हो गई है। 22 दिनों की इस बैसी को कठिन बैसी माना जाता है। यहां बैसी में दो साधक बैठे हैं, जो दिन में एक बार फलहार कर रहे हैं, जबकि तीन बार स्नान भी हो रहा है। गांव छोड़कर शहरों में बस चुके ग्रामीण भी इस बैसी में भाग लेने के लिए इन दिनों गांव पहुंचे हुए हैं।
देहोली गांव की धूंणी में भगत जवाहर सिंह और रघुवर सिंह फर्त्याल बैठे हैं, जो कठिन साधना के माध्यम से गांव, प्रदेश और देश की खुशहाली की कामना कर रहे हैं। गांव के बुजुर्ग पान सिंह फर्त्याल ने बताया कि यहां 62 परिवार रहते हैं अधिकांश लोग अब शहरों में बस चुके हैं, लेकिन बैसी को लेकर सभी लोग इन दिनों गांव पहुंचे हैं, मंदिर में सुबह-शाम भजन-कीर्तनों का आयोजन हो रहा है। 11वें दिन धूंणी में जागर का आयोजन किया जाएगा। जिसमें देवता अवतरित होंगे और ग्रामीणों का मार्गदर्शन भी करेंगे। हालांकि सावन मास में भी बैसी होती है, लेकिन पौष मास की बैसी का विशेष महत्व समझा जाता है। साधक दिन में सिर्फ एक बार फलहार करते हैं, जबकि तीन समय ठंडे पानी से स्नान करना पड़ता है। जिस वक्त धूंणी में फल का भोग लगाया जाता है, उस समय साधक भी फलहार करते हैं। बैसी समारोह को महेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, दीवान सिंह, मोहन सिंह, विशाल आदि सहयोग कर रहे हैं।