कवि सुमित्रानंदन पंत के पैतृक गांव में सभा को संबोधित करते डॉ प्रयाग जोशी।
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प्रसिद्ध कवि सुमित्रानंदन पंत की 118वीं जयंती उनके पैतृक गांव स्यूनराकोट में धूमधाम से मनाई गई। वक्ताओं ने कहा कि पंत महान कवि थे साहित्य की सभी विधाओं में उन्होंने लेखन किया। केवल छायावाद तक उन्हें सीमित करना कविवर पंत की उपेक्षा है।
सुमित्रानंदन पंत स्मारक समिति स्यूनराकोट और महादेवी सृजन पीठ रामगढ़ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि साहित्यकार डॉ. प्रयाग जोशी ने कुमाऊंनी में व्याख्यान देते हुए कहा कि पं. महान कवि थे। अपनी रचनाओं में उन्होंने प्रकृति का शानदार चित्रण किया। डॉ. जोशी ने कहा कि पूर्व में ब्रज भाषा में ही कविताएं लिखी जाती थीॅ, लेकिन 1918 में इलाहाबाद जाने के बाद कविवर पंत ने हिंदी में कविताएं लेखन किया।
वक्ताओं ने कहा कि समित्रानंदन पंत को केवल छायावाद तक सीमित करना उनकी उपेक्षा करना है। अध्यक्षता प्रो. दिवा भट्ट और संचालन नीरज पंत ने किया। जीआईसी कमलेश्वर के बच्चों ने स्वागत गीत और वंदना समेत अन्य कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर काव्य गोष्ठी भी हुई। गोष्ठी में नवीन बिष्ट, रतन सिंह किरमोलिया, प्रो. दिवा भट्ट, महादेवी सृजन पीठ के निदेशक प्रो. देव सिंह पोखरिया,
शोध अधिकारी मोहन सिंह रावत, मनी नमन, मनीष पंत, निर्मल पंत प्रवाह, नारायण सिंह थापा, नारायण दत्त पाठक आदि ने कविता पाठ किया। अंत में सुमित्रा नंदन पंत स्मारक समिति के अध्यक्ष लाल सिंह और मोहन सिंह रावत ने सभी का आभार जताया।