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एक सीटी बजते ही खड़े हो जाते हैं गांव के लोग

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शराब बेचने का विरोध - फोटो : अमर उजाला
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चौखुटिया (अल्मोड़ा)। खीड़ा, पुनियाबगड़ के ग्रामीण शराब के विरोध में एकजुट खड़े हो गए हैं। शनिवार को गांव के लोगों को जैसे ही आबकारी टीम, शराब के मोबाइल वाहन के खीड़ा की तरफ आने की सूचना मिली तो पूरा गांव हरकत में आ गया। ग्रामीणों ने शराब के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। ग्रामीणों ने कहा कि वे शराब का विरोध करते हुए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। खीड़ा, पुनियाबगड़ के ग्रामीणों में एकजुटता के साथ ही आपसी तालमेल भी बहुत अच्छा है। किसी भी मामले में एक सीटी बजते ही पूरे गांव के कान खड़े हो जाते हैं। देखते-देखते मौके पर पूरा गांव उमड़ पड़ता है। गांव के लोगों की इसी विशेषता के चलते पुलिस प्रशासन तमाम कोशिशों के बावजूद शराब बेचने में नाकाम हो गया है।
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एक तरफ शासन-प्रशासन की खीड़ा पुनियाबगड़ में हर हाल में सरकारी अंग्रेजी, देसी शराब बेचने की जिद तो दूसरी ओर किसी भी कीमत पर शराब न बेचने देने के लिए अड़े ग्रामीण। पिछले कई दिनों से दोनों ओर से चल रही खींचतान के बीच पूरे क्षेत्र का माहौल गर्म है। क्षेत्र में आए दिन विरोध, प्रदर्शन हो रहे हैं। इसी कड़ी में खीड़ा के ग्रामीणों को शनिवार को शराब के मोबाइल वाहनों के साथ आबकारी टीम के खीड़ा की तरफ रवाना होने की सूचना मिली। इसी सूचना के आधार पर एकत्रित हुए ग्रामीणों ने खीड़ा, पुनियाबगड़ में शासन, प्रशासन, शराब के विरोध में नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला। ग्रामीणों ने किसी भी हाल में शराब न बेचने देने का ऐलान किया है। जुलूस प्रदर्शन में प्रधान आनंदी देवी, सीता, मोहनी, हीरा, चंपा, दीपा, रितिका, विमला, मधुली, धना, खष्टी, नीमा देवी आदि थीं।

शराब की मोबाइल वैन आने की सूचना पर ग्रामीण चौकन्ने
नारेबाजी के साथ जुलूस निकाला


...और गोदी से ही लौट गई टीम
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। आबकारी विभाग की टीम सरकारी शराब के मोबाइल वाहन के साथ खीड़ा जाने के लिए चौखुटिया तक पहुंची थी। उनके साथ सीओ रानीखेत सहित चौखुटिया थाने की पुलिस आदि भी थी। बताया गया कि सभी लोग गोदी तिराहे तक पहुंचे, लेकिन खीड़ा में ग्रामीणों की हलचल की जानकारी मिलने के बाद गोदी से लौट गए। इस बीच एलआईयू निरीक्षक ने खीड़ा पहुंचकर वहां की वस्तु स्थिति और ग्रामीणों के आक्रामक तेवरों से पुलिस प्रशासन को अवगत कराया।
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डंडे की ताकत पर शराब बिकवाना मुमकिन नहीं
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। पुलिस प्रशासन ने यदि पहले समझदारी दिखाई होती तो उन्हें ग्रामीणों का इस तरह से विरोध नहीं झेलना पड़ता। असल में शराब का ठेका आवंटित होने से पहले संबंधित अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें विश्वास में लेने की कोशिश नहीं की। जबकि इससे बीच का रास्ता निकल सकता था। पुलिस, प्रशासन की ओर से लोगों से बातचीत के बजाए जबरदस्ती शराब बेचने का प्रयास किया गया जो नाकाम साबित हो रहा है। संबंधित अधिकारियों द्वारा अपनी इस गलती में सुधार के बजाय उसे फिर से दोहराने की कोशिश की जा रही है। असल में अधिकारियों को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि वे पहाड़ के किसी शांत क्षेत्र में डंडे के बल पर शराब बिकवा लेंगे। इस तरह की कोशिश से स्थितियां बिगड़ने में देर नहीं लगेगी।
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