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पान मसाला कंपनी और विक्रेता पर 6.10 लाख का जुर्माना

Tue, 09 Feb 2016 11:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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अपर जिला मजिस्ट्रेट इला गिरि ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में फ्लेवर्ड पान मसाला (रजनीगंधा) के सैंपल को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 52 और 53 के उल्लंघन का दोषी पाया है और इसे मिसब्रांड उत्पाद मानकर कंपनी के निर्माता धर्मपाल सत्यपाल लि. नई दिल्ली और छोटे लाल पुत्र बद्री प्रसाद गुप्ता जनरल स्टोर कारखाना बाजार पर 6.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। अपर जिला मजिस्ट्रेट ने रजनीगंधा के पैकेट में- मुंह में रजनीगंधा दिल में दुनिया और जब दूसरों के ख्वाब पूरे करोगे तो अपना कल बनता देखेगो..श्लोगन के प्रयोग को भी भ्रामक और उपभोक्ताओं को भ्रमित करने वाला बताया।

अपर जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी कैलाश चंद्र टम्टा ने नौ सितंबर 2013 को कारखाना बाजार अल्मोड़ा में स्थित गुप्ता जनरल स्टोर का निरीक्षण किया और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत दुकान स्वामी छोटे लाल गुप्ता की उपस्थिति में गवाहों के सामने पान मसाला रजनीगंधा के चार नमूने जांच के लिए भेजे। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में निर्माता धर्मपाल सत्यपाल लि. नई दिल्ली और छोटे लाल पुत्र बद्री प्रसाद गुप्ता जनरल स्टोर कारखाना बाजार को मिस ब्रांड का दोषी पाकर दोषियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 की धारा तीन के अंतर्गत न्याय निर्णयन करने का अनुरोध किया था।
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अपर जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर दोनों को नोटिस भेजा गया। निर्माता धर्मपाल सत्यपाल द्वारा वाद प्रतिवाद के लिए सुभाष शर्मा को अपना प्रतिनिधि घोषित किया गया। प्रतिवादी नंबर एक छोटे लाल पुत्र बद्री प्रसाद गुप्ता ने न्यायालय में उपस्थित होकर यह बताया कि पान मसाले का सैंपल उनकी दुकान से लिया गया, लेकिन यह उनके द्वारा निर्मित नहीं था। उन्होंने छोटा व्यापारी होने के नाते उन्हें क्षमा प्रदान करने और निर्माता कंपनी पर कानूनी कार्रवाई करने का अनुरोध किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपर जिला मजिस्ट्रेट ने रजनीगंधा कंपनी द्वारा फ्लेवर्ड पान मसाले के पैकेट में प्रयोग किए जा रहे स्लोगन को मिथ्याछाप और भ्रामक माना है। अपर जिला मजिस्ट्रेट ने खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम की धारा 53 के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर निर्माता कंपनी पर पांच लाख और धारा 52 के उल्लंघन का दोषी पाए जाने पर स्थानीय वितरक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जबकि मिस ब्रांड खाद्य पदार्थ बेचने पर स्थानीय विक्रेता छोटे लाल पर 10 हजार रुपये का जुर्माना अलग से लगाया गया है और भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं करने के लिए भी सचेत किया गया है।
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