रानीखेत (अल्मोड़ा)। छावनी अधिनियम 2006 और कैंट लैंड एडमिनिस्ट्रेशन रूल 1937 में व्यापक संशोधन और कर्मचारियों के स्थानांतरण नीति बनाने की मांग पर सार्थक कार्रवाई के आसार दिखने लगे हैं। अखिल भारतीय कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष, सदस्य एसोसिएशन की इस पहल पर कई सांसदों ने भी प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बीते दिनों देश के 62 कैंटों के अंतर्गत 50 सांसदों से इस बारे मुलाकात की थी।
मालूम हो कि छावनी के जटिल कानूनों के चलते लीज नवीनीकरण, दाखिल-खारिज सहित तमाम कार्यों के लिए नागरिकों को भारी दिककतें होती हैं। कैँट एक्ट 1924 का 2006 में संशोधन हुआ, लेकिन इस संशोधन से भी कोई लाभ नहीं मिला। कर्मचारियों के लिए आज तक स्थानांतरण नीति नहीं बनाई गई है। नागरिकों की मांग है कि कर्मचारियों के लिए स्थानांतरण नीति होना जरूरी है।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव और कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष मोहन नेेगी ने बताया कि 50 सांसदों से इस संबंध में मुलाकात की गई थी। अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ के सांसद अजय टम्टा, हिमाचल के सांसद शांता कुमार, वीरेंद्र कश्यप, सांसद दिलीप गांधी, मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल, सांसद हेमंत गोडसे, विष्णु दत्त शर्मा सहित कई सांसदों ने इन मांगों को लेकर प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सभी ने इस संबंध में पत्र भेजे हैं। उन्होंने बताया कि आगा मानसून सत्र जुलाई में सांसदों से फिर से एसोसिएशन के पदाधिकारी मुलाकात करेंगे।