विपत्ति के समय अपनों का सहारा मिले तो मनुष्य संभल जाता है, लेकिन छह अबोध बच्चों पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि उनके सिर पर हाथ रखकर सहारा देने वाला अब कोई नहीं है।
एक साल पहले पिता की मौत और पांच दिन पहले मां का साया उठने से तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत गोलने सिटोली में नाबालिग छह बच्चे अनाथ हो गए हैं। मां-बाप की मौत से इन बच्चों को खाने के भी लाले पड़ गए हैं। आसपास के ग्रामीण बारी-बारी से इन बच्चों को खाना खिला रहे हैं जो भी इन बेसहारा बच्चों के पास पहुंच रहा है वह आंसू नहीं रोक पा रहा है।
ग्राम पंचायत गोलने सिटोली निवासी बहादुर राम और भवानी देवी अपने छह बच्चों बबीता (15), तारा (12), राधा (10), रेखा (6) कमल (4), रमा (3) की किसी तरह परवरिश कर रहे थे। बहादुर राम मजदूरी करते थे। एक साल पहले 45 साल की उम्र में बहादुर राम की मौत हो गई थी। इसके बाद मां भवानी देवी (32) पर बच्चों की जिम्मेदारी आ गई। तीन बेटियां बबीता कक्षा नौ, तारा कक्षा सात और राधा कक्षा पांच में पढ़ रही हैं। मां भवानी देवी मजदूरी कर किसी तरह बच्चों को पाल रही थी, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। कई दिन स्वास्थ्य खराब रहने के बाद पांच दिन पहले भवानी देवी की भी मौत हो गई। इन अबोध बच्चों के सिर से मां भवानी देवी का साया भी उठ गया है। अब इनका आगे-पीछे कोई नहीं है। बच्चों के ताऊ की भी बीते दिनों होली में मौत हो गई है।
अनाथ हो गए बच्चों को खाने के भी लाले पड़ गए हैं। ग्रामीण इन बच्चों के भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। थोड़ा बहुत समझदार बबीता किसी तरह भाई बहनों को समझा रही है। छोटे-छोटे बच्चे बार-बार मां को पुकार रहे हैं। दो कमरों के मकान की स्थिति भी ठीक नहीं है। दरवाजे टूटे हुए हैं। इन अनाथ बच्चों को देखने वाला कोई नहीं है। अब इन बच्चों के परवरिश की समस्या आ गई है।
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बच्चों की परवरिश को तहसीलदार को दिया ज्ञापन
सोमेश्वर। गोलने-सिटोली गांव की प्रधान पुष्पा देवी ने तहसीलदार को ज्ञापन देकर बच्चों की परवरिश के लिए उचित इंतजाम करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि भवानी देवी की मौत के बाद बच्चों के खाने की ग्रामीण व्यवस्था कर रहे हैं।