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चैत्राष्टमी मेले का रंगारंग आगाज

Sun, 10 Apr 2016 11:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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मेला - फोटो : अमर उजाला
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 अगनेरी मंदिर परिसर में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पांच दिवसीय चैत्राष्टमी मेले का आगाज हो गया है। इस दौरान कुमाऊंनी, गढ़वाली लोक गीतों की धूम रही। नौ दुर्गा के प्रतीक नौ बालिकाओं की पूजा-अर्चना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इससे पूर्व दीप प्रज्वलित कर मेले का शुभारंभ हुआ।

मां काली के अगनेरी मंदिर परिसर में मेले के उद्घाटन पर गेवाड़ सांस्कृतिक कला मंच के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत वंदना से सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुए।  इसी क्रम में गढ़वाली लोक गीत चल देवरी डाना, भमोर पक्यूंला और कुुमाऊंनी गीत लाली ओ लाली होंशिया, पधानों की लाली त्वीलै धारौ बौला की प्रस्तुति ने धूम मचाई। कलाकारों का निर्देशन मौनू, भुवन और हरदा ने किया।
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इससे पहले नौ दुर्गा की प्रतीक नौ बालिकाओं की  पूजा-अर्चना की गई। जिनमें मानषी संगेला, आस्था जोशी, रिद्धी कैड़ा, लक्ष्मी कैड़ा, कनक कैड़ा, रक्षिता अटवाल, स्नेहा नेगी, यशिका सिंह और दीक्षिता कैड़ा शामिल थीं।
 मेला समिति के अध्यक्ष डा. कुलदीप सिंह बिष्ट ने सभी का स्वागत करते हुए सहयोग के लिए आभार जताया। मेले का उद्घाटन करने वालों में पुजारी नंदाबल्ल्भ जोशी, पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, टी बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष कुबेर सिंह कठायत, ब्लाक प्रमुख बिशन राम, जिला पंचायत सदस्य गजेंद्र नेगी, पूर्व प्रमुख मीना कांडपाल, नंदन संगेला, गणेश नायक, जसीराम, जीवन नेगी, दरबान सिंह बिष्ट, सावित्री कठायत, पुष्कर कांडपाल, आनंद किरौला, वीरेंद्र बिष्ट, दयाल मेहरा, दान सिंह कुमयां, आनंद नाथ, दीपू बिष्ट, ललित टडियाल, शारदा देवी, हीरासिंह थापा, राजेंद्र तिवारी, लीला संगेला, रुचि बंग्वाल, आशा वर्मा, शिव सिंह, आनंद मनराल, लीला कैड़ा, विक्रम कैड़ा सहित तमाम लोग शामिल थे। संचालन जसीराम ने किया।

इधर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही बुजुर्ग कलाकारों द्वारा झोड़ा, चांचरी और छपेली की प्रस्तुति का भी लोगों ने आनंद लिया। अंत में पुष्पेश त्रिपाठी, कुबेर सिंह कठायत और डा. कुलदीप बिष्ट आदि ने लोगों को संबोधित किया।
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हेम कांडपाल।

इन्सेट

मां के दरबार में सभी बराबर
चौखुटिया(अल्मोड़ा)। 14 अप्रैल को होने वाले मुख्य मेले में बलि प्रथा के स्थान पर नारियल तोड़ने की प्रथा के साथ ही एक और नई परंपरा शुरू हुई है। जिसकी झलक उद्घाटन मौके पर देखने को मिली है। आयोजन समिति की ओर से अतिथि के रूप में व्यक्ति विशेष को तव्वजो देने के बजाए पंडाल में बैठे सभी लोगों को अतिथि मानकर संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कराया गया। मेला समिति के अध्यक्ष डा. कुलदीप बिष्ट का कहना था कि मां के दरबार में न कोई खास है न आम सब बराबर हैं। इसलिए सामूहिक रूप से उद्घाटन का निर्णय लिया गया।
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