सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैंती से गर्भवतियों को जांच के लिए लगानी पड़ती है 35 किमी की दौड़
अल्मोड़ा। दूरस्थ विकासखंड लमगड़ा के 40 गांवों के 30 हजार लोगों के समक्ष इलाज अब तक चुनौती बना हुआ है। जैंती में सीएचसी तो खोला गया लेकिन यहां मंजूर डॉक्टरों के नौ पदों में से आठ खाली हैं। रोजाना 100 से अधिक मरीज यहां आते हैं और इलाज के लिए जिला और बेस अस्पताल सहित हल्द्वानी की दौड़ लगाते हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जैंती में चिकित्सकों के स्वीकृत नौ पदों में से आठ पद रिक्त हैं। एकमात्र डॉक्टर के भरोसे अस्पताल चल रहा है। व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए दो बांडधारी चिकित्सकों की भी तैनाती की गई हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने से गर्भवतियों को जांच के लिए हर माह जिला मुख्यालय आना पड़ता है। इस अस्पताल पर बसगांव, भाबू बिराड़, ल्वाली, बचकांडे, ध्यूली धौनी, नया संग्रोली, बस्टा, कुंज, जैंती, कांडे, कालाडुंगरा, शिल्पड़, खाना खरकोटा, पुभाऊं आदि गांवों के स्वास्थ्य का जिम्मा है।
एक्स-रे मशीन तकनीशियन के अभाव में शोपीस
सीएचसी जैंती में एक्सरे मशीन का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। एक्स-रे तकनीशियन के अभाव में सीएचसी में आने वाले मरीज निजी लैब पर जाकर एक्सरे कराने को मजबूर हैं।
कोट-चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन से पत्राचार किया गया है। चिकित्सक मिलने पर ही नियुक्ति की जाएगी। - डॉ. आरसी पंत, सीएमओ अल्मोड़ा।