उम्रदराज, खटारा बसें, मैकेनिकों सहित तकनीकी कर्मचारियों का अभाव और क्षेत्रीय कार्यालय से स्पेयर पार्ट्स की नियमित आपूर्ति नहीं। यह हालत है परिवहन निगम के स्थानीय डिपो की। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद स्थानीय डिपो में नई बसें नहीं मिल सकी हैं, जिसके चलते दुर्घटना की आशंका है। डिपो में वर्तमान छह बसें निर्धारित उम्र पार कर चुकी हैं। बसों की कमी के कारण खटारा बसों को कार्यशाला में प्रतिदिन ठोक पीटकर किसी तरह कामचलाऊ बनाया जाता है।
रानीखेत में परिवहन निगम के डिपो की स्थापना 1951 में हुई थी, लेकिन लगातार अनदेखी के कारण डिपो लगातार गर्त में जा रहा है। हालात यह हैं कि डिपो में बस बेड़े की कमी है इसी कारण उम्रदराज और खटारा हो चुकी बसों से काम चलाया जा रहा है। जिसके चलते यात्रा में भारी जोखिम है। छह बसें निर्धारित छह लाख किमी, छह साल की उम्र पार कर चुकी हैं। यह बसें दिल्ली जैसे लंबे रूटों पर भी दौड़ रही हैं। फोरमैन जेसी पाठक ने बताया कि उम्रदराज बसों में ब्रेक, स्टेयरिंग लॉकडाउन आदि तकनीकी खामियां हैं। टिन सड़ने के कारण बरसात का पानी बस के अंदर आ जाता हैं। रोडवेज कर्मचारी परिषद के सचिव मनोहर रावत का कहना है कि कार्यशाला में स्पेयर पार्ट्स का भी अभाव है। जिसके चलते खराब बसें हफ्तेभर तक खड़ी रहती हैं, काठगोदाम स्थित क्षेत्रीय कार्यालय से नियमित और समय पर पार्ट्स की आपूर्ति नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि सीनियर फोरमैन जेसी पाठक की तत्परता के चलते कार्यशाला में बसों को किसी तरह संचालन योग्य बनाया जा रहा है।
रोडवेज डिपो के पास वर्तमान में सिर्फ 28 से 30 बसें हैं, बसों के अभाव में ही अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़ सहित अधिकांश पर्वतीय रूटों पर सेवा समाप्त कर दी गई। कुल 40 नई बसों की जरूरत है। जबकि 20 नए चालकों की जरूरत है। डिपो में मैकेनिक, बॉडी मैकेनिक, पेंटर आदि तकनीकी कर्मचारियों का अभाव है। एआरएम केएस रावत का कहना है कि नई बसों के लिए निगम प्रशासन को पत्र भेजा गया है।