प्रसिद्ध जनकवि और रंगकर्मी गिरीश तिवारी गिर्दा को उनकी पांचवीं पुण्यतिथि पर याद किया गया। पहरू कुमाऊं मासिक पत्रिका और कुमाऊंनी भाषा साहित्य, संस्कृति प्रचार समिति कसारदेवी की ओर से सांस्कृतिक जुलूस निकाला। जुलूस में शामिल लोग गिर्दा के लिखे ओ जैंता इक दिन तो आलो य दुनी में... सहित अन्य गीत गाते हुए चल रहे थे।
उन्होंने गिर्दा के आज हिमाल तुमन कै धत्यू, जागो-जागो मेरो लाल, हम लड़ते रया हम लड़ते रूलो, उत्तराखंड मेरी मातृभूमि आदि गीत गाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
राजकीय संग्रहालय में हुई संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि गिर्दा जमीन से जुड़े व्यक्ति थे। उन्होंने जनता की पीड़ा और संवेदनाओं को समझ कर गीत लिखे।
सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद जालिम निजाम के खिलाफ उन्होंने जन आंदोलनों में बढ़चढ़ कर भाग लिया। गिर्दा ने पहाड़ के जल, जंगल, जमीन को बचाने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
इस मौके पर जीवन चंद्र, पूरन तिवारी, उपपा के अध्यक्ष पीसी तिवारी, गोविंद महरा, कटक पालिका अध्यक्ष जंगबहादुर थापा, दीवान बिष्ट, डा. जीसी दुर्गापाल, केवलानंद तिवारी ने विचार रखे।
अध्यक्षता डा. शमशेर बिष्ट ने और संचालन ईश्वरी दत्त जोशी ने किया। कार्यक्रम में डा. प्रीति आर्या को भारतेंदु निर्मल जोशी स्मृति समालोचना पुरस्कार 2014 प्रदान किया गया। समिति सचिव डा. हयात रावत ने सभी का आभार जताया।
जुलूस में पत्रकार नवीन बिष्ट, गायक लता पांडे, विमला बोरा, दीप्ति भोजक, पूरन सिंह बोरा, पवनेश ठकुराठी, चंदन बोरा, गोपाल सिंह चम्याल, अजय तिवारी, रमेश दास, लीला खोलिया, रूप सिंह बिष्ट, केबी पांडे आदि शामिल थे।