1967 के विधानसभा चुनाव में रानीखेत सीट को अब तक के चुनावी इतिहास में सबसे हॉट सीट माना जाता है। तब मुकाबला कांग्रेस के हैवीवेट प्रत्याशी यूपी के पूर्व सीएम चंद्रभानु गुप्ता और पृथक पर्वतीय राज्य संगठन के प्रत्याशी क्षेत्र के कद्दावर नेता स्व. गोविंद सिंह माहरा के बीच था। जैसे ही चुनाव ने पहाड़ बनाम लखनऊ का रंग लिया, तो कवरेज के लिए बीबीसी से मार्क टुली और ब्लिट्ज संवाददाता यहां पहुंचे। उन्होंने एक महीने तक चुनाव की कवरेज कर रानीखेत को देश विदेश में ख्याति दिला दी। हालांकि स्व. गोविंद सिंह माहरा 49 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए, लेकिन पूर्व सीएम होने के बावजूद स्व. गुप्ता को इस चुनाव में जीत के लिए काफी पापड़ बेलने पड़े।
मालूम हो कि 1957 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सल्ट के लक्ष्मण सिंह अधिकारी चुनाव जीते थे। तब यूपी में कांग्रेस ने चंद्रभानु गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाया, बताते हैं कि श्री अधिकारी ने गुप्ता के लिए सीट खाली कर त्यागपत्र दिया। श्री गुप्ता ने रानीखेत सीट से उपचुनाव लड़ा। इसके बाद 59 और 61 में चंद्रभानु गुप्ता ने यहीं से चुनाव लड़कर जीत हासिल की। 1967 का आम चुनाव खास था, इस चुनाव से जहां पृथक पर्वतीय राज्य की मांग ने जोर पकड़ा। वहीं रानीखेत ने भी ख्याती पायी। तब पृथक पर्वतीय राज्य संगठन ने विधानसभा से स्व. गोविंद सिंह माहरा और लोकसभा के लिए बीके पांडे को उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद 1969 के चुनाव में भी क्षेत्र से दोनों नेता आमने सामने थे। स्व. माहरा ने तब भारतीय क्रांति दल से चुनाव लड़ा और काफी कम वोटों के अंतर से चुनाव हारे।
1967 में रानीखेत विधानसभा सबसे बड़ी विधानसभा थी। सल्ट, भिकियासैंण, तल्ला रामगढ़, मल्ला रामगढ़, मुक्तेश्वर, बेतालघाट, सिवालबाड़ी भी इसी क्षेत्र में शामिल थे। बताते हैं कि पृथक पर्वतीय राज्य के बैनर तले सल्ट के भौंनखाल में विशाल जनसभा हुई। जिसमें हजारों लोगों को हुजूम उमड़ पड़ा था।