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नाद के बिना गीत, स्वर, राग समेत कुछ भी संभव नहीं : डॉ. जोशी  

Fri, 19 Apr 2019 11:50 PM IST
दीपक नेगी अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा।
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एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के योग शिक्षा विभाग में आयोजित कार्यशाला में मौजूद प्रतिभागी। - फोटो : amar ujala
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एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के योग शिक्षा विभाग के की ओर से योग शिक्षा विभाग में वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों का चिकित्सकीय अनुप्रयोग विषय पर आयोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय  कार्यशाला में छठवें दिन प्राकृतिक चिकित्सक और नव योग इंस्टीट्यूट आफ नई दिल्ली के योग एंड नैचरोपैथी साइंस के निदेशक डॉ. नवदीप जोशी ने नाद योग के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि नाद का अर्थ शब्द, ध्वनि, आवाज है। नाद के बिना गीत, स्वर, राग आदि कुछ भी संभव नहीं है।
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उन्होंने बताया नाद आहत और अनाहत दो प्रकार का होता है। अनाहत नाद आंतरिक ध्वनि है जिसे योगी ही सुन सकते हैं। कहा कि वर्तमान में जीने की कला नवयोग है। अपने दुखों, कष्टों से मुक्ति का उपाय ही जीवन जीने की कला है। इन दोनों सत्रों में प्रतिभागियों को व्यक्तित्व निर्माण की कई जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि नवयोग हिलिंग के जरिये सभी रोगों की चिकित्सा की जाती है। योग विभागाध्यक्ष तथा कार्यशाला संयोजक डा. नवीन चंद्र भट्ट ने बताया कि नादयोग साधना से हम अपने विचार कर्म को अपने लक्ष्य प्राप्ति का साधन बना सकते हैं।
इस मौके पर डॉ. प्रेमप्रकाश पांडेय, डॉ. लल्लन कुमार सिंह, हेमलता अवस्थी, डॉ. ललित जोशी, चंदन बिष्ट, मनोज गिरी गोस्वामी, गौरव पांडेय, ललित मोहन जोशी, ऋतु पांडेय, पवन जोशी, प्रदीप जोशी, संदीप नयाल, प्रियंका जोशी, नेहा बिष्ट, रेनू कार्की, मोहित जाट, मोहित कुमार, अनीता बिष्ट, दीपिका अधिकारी, गीता पांडे आदि मौजूद थे। 
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