उत्तराखंड राज्य बनने के 16 सालों बाद भी तहसील क्षेत्र में कोल्ड स्टोर नहीं बन सका है। कोल्ड स्टोर नहीं होने के कारण काश्तकार फल और सब्जी आदि का भंडारण नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण काश्तकारों को उत्पादित माल को औने-पौने दामों में बेचना पड़ता है। ऐसी स्थिति में काश्तकारों को उत्पादित फसल का लागत मूल्य भी नहीं मिल पाता है और आर्थिक हानि उठानी पड़ रही है।
जैंती तहसील क्षेत्र के लमगड़ा, ठाठ, कल्टानी, जलना, पौधार, गड़ापानी, छड़ौजा, बेडचूला, पजैना, ज्वारनेडी, कुटौली खांकर, सिल्पड़, मोतियापाथर, नाटाडोल, भांगादयोली, मेरगांव, डोल, शहरफाटक, गजार, पूनागढ़, डामर, चौखुटिया, चायखान आदि क्षेत्र में आलू, सेब, नाशपाती और जैंती, कांडे, भट्यूड़ा, बकस्वाड़, सेल्टाचापड़, स्योड़ा, उड्यारी, दाड़िमी, कुंज, बांजधार, बिनौला, भाबू, बिराड़ आदि क्षेत्रों में नींबू, माल्टा, नाशपाती, केला, अनार, दाड़िम, संतरा, आडू, खुमानी, अंगूर आदि का बहुतायत में उत्पादन होता है। ग्रामीण क्षेत्र में लंबे समय से कोल्ड स्टोर बनाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोल्ड स्टोर नहीं बन सका है। कोल्ड स्टोर नहीं होने के कारण काश्तकार फल और सब्जी आदि का भंडारण नहीं कर पाते हैं।
इस कारण काश्तकारों को फल, सब्जी को औने पौने दामों में बेचना पड़ता है। ऐसी स्थिति में काश्तकारों को फसल का लागत मूल्य भी नहीं मिल पाता है।
कई बार काश्तकार सब्जी उत्पादन के लिए बैंकों से ऋण लेते हैं, लेकिन उत्पादित सब्जी और फल का उचित लागत मूल्य नहीं मिलने के कारण काश्तकारों को बैंक का ऋण चुकाने में काफी दिक्कतें होती हैं। नौगांव के काश्तकार अमर सिंह बोरा ने बताया कि उत्पादित माल को उचित बाजार भाव नहीं मिल पाता है। इस कारण क्षेत्रीय किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने जैंती तहसील क्षेत्र में शीघ्र कोल्ड स्टोर बनाने की मांग की है।