भैंसियाछाना ब्लाक के आपदा से प्रभावित गांव खैरखेत और बूढ़ाधार में रहने वाले लोगों को बारिश के मौसम में खतरा और बढ़ गया है। प्रशासन ने यहां रहने वाले 55 परिवारों को गांव छोड़कर सुरक्षित स्थान में शरण लेने की हिदायत दी है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों से किराए पर घर लेकर रहने को कहा है। किराए पर घर लेने पर उन्हें बरसात के सीजन तक प्रति माह तीन हजार रुपये प्रति परिवार के हिसाब से किराए का भुगतान किया जाएगा।
मालूम हो कि भैंसियाछाना ब्लाक के अंतर्गत खैरखेत और बूढ़ाधार गांवों में पिछले कई सालों से भूस्खलन हो रहा है। 2010 में पहली बार यहां भारी भूस्खलन हुआ। उसके बाद हर साल भूस्खलन की घटनाएं होती रहती हैं। खासतौर पर बरसात के मौसम में इस पूरे इलाके में खतरा काफी बढ़ जाता है। इन दोनों गांवों में रहने वाले करीब 55 परिवारों के घरों को तो खतरा है ही, उनकी उपजाऊ जमीन भी बरबाद होती जा रही है। इनमें से कुछ परिवार पिछले कई सालों से प्राथमिक स्कूल के भवन में रह रहे हैं।
दोनों गांवों के प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित करने के लिए प्रशासन ने गांव से कुछ दूरी पर सुरक्षित जगह चिन्हित कर ली है और मनरेगा योजना के अंतर्गत जमीन का समतलीकरण भी कर लिया गया है। वहां सड़क भी बन गई है। एसडीएम विवेक राय ने बताया कि प्रभावितों को इस स्थान पर विस्थापित करने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
शासन से हरी झंडी मिलते ही जमीन आवंटित कर दी जाएगी और भविष्य में प्रभावित परिवार इसी स्थान पर अपने आवास बना सकेंगे। गत दिवस एसडीएम श्री राय ने गांव में जाकर स्थिति का जायजा लिया। एसडीएम ने बताया कि बारिश के सीजन में खतरे को देखते हुए प्रभावित परिवारों से आसपास किराए पर आवास लेने को कहा गया है। इसके लिए बरसात के सीजन तक अगर वह किराए पर घर लेते हैं तो उन्हें प्रति माह तीन हजार रुपये प्रति परिवार के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।
अब प्रभावितों ने नारा दिया विस्थापन नहीं तो वोट नहीं
बूढ़ाधार और खैरखेत के आपदा प्रभावित लोगों ने चेतावनी दी है कि उनका शीघ्र विस्थापन नहीं किया गया तो सभी लोग आने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे और गांव में किसी को भी वोट मांगने के लिए नहीं घुसने दिया जाएगा।
कई सालों से आपदा झेल रहे ग्रामीणों ने बताया कि हर साल बरसात आने पर उन पर खतरा मंडराने लगता है। सभी के घरों की हालत खराब हो चुकी है। सीलन के कारण बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई सालों से उन्हें विस्थापित करने के आश्वासन मिलते रहे हैं। अधिकारी और जनप्रतिनिधि गांव में आकर घोषणाएं कर जाते हैं, लेकिन धरातल पर खास काम नहीं हुआ है।
क्षेत्र पंचायत सदस्य संतोष कुमार आर्या, जगदीश राम, ठाकुर राम, बबलू राम, मनोज आर्या, राधिका देवी आदि ने कहा कि उन्हें कई सालों से झूठे आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन आज तक विस्थापन की व्यवस्था नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को किराए पर एक कमरा लेने को कहा जा रहा है, लेकिन उनके पालतू जानवर कहां जाएंगे। ग्रामीणों ने कहा कि अगर शीघ्र विस्थापन की व्यवस्था नहीं हुई तो आने वाले विधानसभा चुनावों में प्रभावित लोग मतदान नहीं करेंगे और किसी भी दल के लोगों को गांव में नहीं आने दिया जाएगा।
इस सीजन में तीन घर हो गए क्षतिग्रस्त
बरसात के इस सीजन में खैरखेत निवासी सुरेश राम, हरीश राम और भीमराम के घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। प्रभावितों ने बताया कि क्षेत्रीय पटवारी ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लेकर रिपोर्ट तहसील मुख्यालय में भेज दी है। ग्रामीणों को गांव से विस्थापित किया जाना है इसलिए क्षतिग्रस्त घरों के जीर्णोद्धार करना भी संभव नहीं है।
दीप जोशी