1500 से 3000 किराया चुकाने के बाद मिलती है लकड़ी
गरुड़ (बागेश्वर)। करीब एक लाख की आबादी वाले गरुड़ तहसील क्षेत्र को लकड़ी टॉल का इंतजार है। लोगों को शवदाह के लिए जिला मुख्यालय से 1500 से 3000 रुपये खर्च कर वाहन के माध्यम से लकड़ी मंगानी पड़ती हैं। लंबे समय से मांग करने के बावजूद समस्या का निदान नहीं होने से क्षेत्रवासियों में शासन-प्रशासन को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
तहसील क्षेत्र में 106 ग्राम पंचायत हैं। क्षेत्र के बैजनाथ, पिंगलो, द्यौनाई, लाहुरघाटी आदि क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर एक दर्जन से अधिक श्मशान घाट बने हैं। जहां शवदाह के लिए लकड़ी जिला मुख्यालय में बने श्मशान घाट से मंगानी पड़ती है। पहले से लोग घरों से ही लकड़ियां लेकर आते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह चलन समाप्त हो गया है। क्षेत्रवासियों के पास जिला मुख्यालय से लकड़ी मंगाने के अलावा सरयू-गोमती संगम पर बने श्मशान घाट पर शवदाह का विकल्प रहता है। हालांकि जिला मुख्यालय शव लाने पर बस का किराया सात हजार रुपये चुकाना पड़ता है।
कोट
पुराने समय में लोग शव के साथ-साथ शवदाह के लिए घरों से ही कंधों पर लकड़ी लेकर आते थे, लेकिन अब समय बदल गया है। शासन-प्रशासन को जनहित को देखते हुए गरुड़ क्षेत्र में लकड़ी टॉल खोलना चाहिए।
गोपाल दत्त भट्ट, वरिष्ठ साहित्यकार
कोट
तहसील क्षेत्र में लकड़ी टाल होना बेहद आवश्यक है। गरीब लोग शवदाह के लिए जिला मुख्यालय नहीं जा सकते, वहां से लकड़ी मंगाना भी भारी पड़ता है। सरकार को लंबे समय से चली आ रही मांग को जल्द पूरा करना चाहिए।
भावना वर्मा, नगर पंचायत अध्यक्ष, गरुड़,
कोट
प्रदेश के पूर्व सीएम हरीश रावत के कार्यकाल में लकड़ी टाल खोलने की बात हुई थी, लेकिन भाजपा की सरकार बनने के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। कांग्रेस इस मामले को सरकार के सम्मुख उठाएगी।
ललित फर्स्वाण, पूर्व विधायक,
कोट
गरुड़ क्षेत्र में लकड़ी टाल खोलने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे। जल्द से जल्द लोगों को सुविधा प्रदान की जाएगी।
पार्वती दास, विधायक