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सूरी के लोगों को बस पकड़ने के लिए लगानी पड़ती है दो किमी की दौड़

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अल्मोड़ा के सूरी गांव में खस्ताहाल पैदल रास्ते से सिर में सिलिंडर ले जाती गांव की महिलाएं। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। आजाद हिंद फौज के सिपाही और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गोपाल नाथ गोस्वामी के पैतृक गांव सूरी में अब तक सड़क नहीं पहुंच पाई है। इस गांव के लोगों को बस पकड़ने के लिए दो किमी पैदल चलकर सड़क तक आना पड़ता है। इससे कई बार ग्रामीणों की बस छूट जाती है।
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जिले के अंतिम छोर में बसे सूरी गांव में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों में इस बात की टीस है कि आजाद हिंद फौज के सिपाही और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गोपाल नाथ गोस्वामी का पैतृक गांव होने के बावजूद अब तक की सरकारों ने यहां की कोई सुध नहीं ली। ग्रामीणों को जिला मुख्यालय या अन्यत्र जाने के लिए बस पकड़ने दो किमी पैदल चलकर नजदीकी स्टेशन बाराकोट आना पड़ता है। दो किमी की दूरी में कुछ स्थान पर खड़ी चढ़ाई भी पड़ती है। कंधे और सिर पर सामान लादकर ग्रामीण बस पकड़ने घर से चल देते हैं। गांव को जोड़ने वाला पैदल रास्ता भी खस्ताहाल है। सड़क के अभाव में ग्रामीण गंभीर मरीजों और गर्भवतियों को डोली में नजदीकी स्टेशन लाते हैं। सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बाराकोट से सामान खच्चरों में ढोना पड़ता है।
सुविधाओं के अभाव में गांव से बढ़ रहा पलायन
अल्मोड़ा। गांव के सड़क से नहीं जुड़ने से हो रही परेशानियों ने ग्रामीणों को पलायन के लिए मजबूर कर दिया है। गांव के लोग बताते हैं कि यातायात की बेहतर सुविधा नहीं होने के कारण गांव से कई लोग पलायन कर गए है। चुनाव के समय नेता हर साल गांव में आकर विकास के दावे करते हैं लेकिन सत्ता में आते ही फिर गांव से मुंह मोड़ लेते हैं। संवाद
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सिर और कंधों पर सिलिंडर ढोना है नियति
अल्मोड़ा। सिर और कंधे में सिलिंडर लादकर ले जाना इस गांव की नियति बन गई है। गैस सिलिंडर खत्म होने पर उसे रिफिल कराने ग्रामीणों को दो किमी दूर बाराकोट आना पड़ता है। संवाद
सूरी गांव में सड़क बनाने की मांग के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों के माध्यम से संबंधित विभाग के अधिकारियों और शासन को ज्ञापन भेजे गए। गांव में आने वाले जनप्रतिनिधियों को इस मामले में कई बार अवगत कराया लेकिन अब तक सड़क के लिए सर्वे तक नहीं हुआ है।
- हीरा सिंह भंडारी, पूर्व प्रधान
बचपन से गांव में सड़क पहुंचने का सपना देखता आ रहा हूं लेकिन अब उम्र के आखिरी पड़ाव में भी सड़क बनते नहीं देख पा रहा हूं। बस पकड़ने के लिए बुढ़ापे में भी दो किमी पैदल चलना पड़ता है। बारिश में रास्ते खराब होते है दुर्घटनाएं भी होती हैं।
- आन सिंह कुटौला, सूरी
सरकार गांव में विकास की बात कहती है लेकिन आजाद हिंद फौज के सिपाही गोपाल नाथ के इस गांव में अब तक किसी भी सरकार ने नजरें इनायत नहीं की। सड़क के अभाव में युवा वर्ग गांव में रहना नहीं चाहता है। सड़क बनाने के लिए कई बार शासन को ज्ञापन दे चुके हैं।
- धर्मेंद्र बिष्ट, सूरी
सूरी गांव को सड़क से नहीं जोड़ना आजाद हिंद फौज के सिपाही गोस्वामी का अपमान है। गांव के जिस लाल ने आजादी के लिए अपना सर्वस्व लुटाया आज सरकार उसके गांव को ही भूल गई। यदि गांव के लिए सड़क बनाने की योजना जल्द नहीं बनी तो आंदोलन किया जाएगा।
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- देवेंद्र नाथ गोस्वामी, सूरी
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