सरकार प्रदेश के सात लाख पेयजल कनेक्शनों में मीटर लगाने की बात कर रही है, एक मीटर की कीमत करीब पांच हजार रुपये है। ऐसे में सात लाख मीटर लगाने में 350 करोड़ का खर्चा आएगा।
जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक की माने तो 200 करोड़ रुपये तो हर साल कर्मचारियों को वेतन देने में ही विभाग का खर्च हो जाता है, जबकि वसूली सिर्फ 190 करोड़ हैं। ऐसे में 350 करोड़ रुपयों का इंतजाम कैसे होगा इस बारे में कोई स्पष्ट बात नहीं कर रहा है। हालांकि एमडी का कहना है कि मीटर लगाने का काम धीरे-धीरे किया जाएगा।
गर्मियों में पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त करने की तैयारियों का जायजा लेने अल्मोड़ा पहुंचे सीजीएम गुप्ता ने कहा कि इस बार जाड़ों में अच्छी बारिश नहीं होने से गर्मी में पानी का संकट गहरा सकता है।
इसे देखते हुए जल संस्थान ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों पर आधारित योजनाओं में पानी की कमी होने की स्थिति पर लोगों को टैंकरों से पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों में जल संस्थान के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। साथ ही हैंडपंपों को भी दुरुस्त करने को कहा गया है।
उन्होंने कहा कि नए स्थानों पर भी हैंडपंप लगाने पर विचार किया जाएगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि पेयजल कनेक्शनों में मीटर लगाना सरकार की प्राथमिकता में है। इसलिए भविष्य में बनने वाली सभी योजनाओं में मीटर लगाना शामिल रहेगा।
उन्होंने बताया कि इस बार जल संस्थान का पानी के बिलों से 240 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य है, पिछले साल 190 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी। बाद में उन्होंने जल संस्थान के अधिकारियों को भी लीकेज रोकने सहित व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
इस मौके पर अधीक्षण अभियंता केएस खाती, सुरेश ठाकुर, मुकेश कुमार, सुरेश ठाकुर, मंजुल कुमार आदि मौजूद थे।
पानी के बिल 210 करोड़
वसूली 190 करोड़
खर्च 200 करोड़