अल्मोड़ा। नगर के प्रसिद्ध नंदादेवी मेला आयोजन के लिए शासन से दो साल से अनुदान राशि नहीं मिली है। मेला समिति और मंदिर समिति पिछले दो सालों से अनुदान राशि के बगैर ही मेले का आयोजन करते आ रहे हैं।
तमाम आर्थिक दिक्कतों से जूझने के बाद भी इस बार नंदादेवी का मेला आयोजित किया गया। मेला समिति का कहना है कि मेला आयोजन में करीब छह से सात लाख का खर्च आता है।
सांस्कृतिक राजधानी अल्मोड़ा का नंदादेवी मेला पूरे उत्तराखंड में प्रसिद्ध है। नंदादेवी मंदिर में लगने वाले मेले के आयोजन के लिए शासन से हर साल दो लाख रुपये की अनुदान राशि मिलती थी। मेला समिति के मुख्य संयोजक मनोज सनवाल ने बताया कि 2018-19, 2019-20 से मेले के आयोजन के लिए सरकार से अनुदान राशि नहीं मिली है।
आर्थिक परेशानियों के बावजूद नंदादेवी मेला समिति और मेला कमेटी मेले का आयोजन करते आ रहे हैं। यदि सरकार का रवैया आगे भी ऐसा ही रहा तो मेले के आयोजन में समिति और मंदिर कमेटी को परेशानियों से जूझना पड़ेगा।
मेला समिति और मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों ने अनुदान राशि न मिलने के संबंध में कई बार कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज और राज्य संस्कृति विभाग की निदेशक बीना भट्ट से गुहार लगाई लेकिन पिछले साल और इस साल की अनुदान राशि अब तक नहीं मिली।
मां नंदा-सुनंदा पर श्रद्धालुओं की भारी आस्था है। मेले के आयोजन के लिए शासन से अनुदान राशि दी जाती थी लेकिन पिछले साल और इस साल की अनुदान राशि नहीं मिली है। फिर भी हमने मेले का बेहतर आयोजन किया। सरकार को जल्द अनुदान राशि का भुगतान करना चाहिए ताकि भविष्य में किसी तरह की दिक्कतें न हो।
- मनोज सनवाल, मुख्य संयोजक नंदादेवी मेला समिति
नंदादेवी मेला नगर की शान और उत्तराखंड की पहचान है। यह मेला लोक संस्कृति का संवाहक है। दो सालों से मेले की अनुदान राशि नहीं मिलना चिंताजनक है। इस पर सरकार को त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए और अनुदान राशि को समय पर दिया जाना चाहिए।
- दिनेश गोयल, सलाहकार नंदादेवी मेला समिति
अनुदान राशि के बगैर ही इस बार भी मां नंदा सुनंदा की कृपा से मेले का भव्य और शानदार आयोजन किया गया। मेले को भव्यता देने के लिए हमने पूरे प्रयास किए। श्रद्धालुओं के लिए भी सुविधाओं का विकास किया गया। मेले की अनुदान राशि जल्द दी जानी चाहिए।
- मनोज वर्मा, अध्यक्ष नंदादेवी मंदिर और मेला समिति