अल्मोड़ा। शासन ने जिला मुख्यालय के अस्पतालों में लंबे समय से संबद्ध सात डॉक्टरों की संबद्धता खत्म कर एक माह पहले उन्हें मूल पद पर भेजने के आदेश जारी कर दिए थे। शासन का आदेश जारी होने के बाद पांच डॉक्टरों को कार्यमुक्त कर दिया गया लेकिन इनमें से सिर्फ दो डॉक्टर अपने मूल अस्पतालों में पहुंच सके हैं।
जिले के ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की भारी कमी है। ग्रामीण इलाकों में डॉक्टरों की तैनाती हो भी जाए तो कई बार शासन के अधिकारी ही उन्हें जिला मुख्यालय के अस्पतालों में संबद्ध कर देते हैं, जिससे ग्रामीण जनता को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में तैनात सात डॉक्टर लंबे समय से जिला मुख्यालय के अस्पतालों में संबद्ध किए गए थे। विभिन्न स्तरों से यह मामला उठने के बाद एक माह पहले शासन की ओर से जिला मुख्यालय में संबद्ध सात डॉक्टरों को उनके मूल पदों में जाने के आदेश दिए गए थे। इनमें जिला अस्पताल में संबद्ध दो डॉक्टर, महिला अस्पताल में एक और बेस अस्पताल में चार डॉक्टरों को मूल पदों पर भेजने के लिए आदेश जारी हुए लेकिन आदेश जारी होने के माहभर बाद भी द्वाराहाट और चितई अस्पतालों में ही दो डॉक्टर अपने मूल स्थानों पर लौटे हैं। अन्य पांच डॉक्टर मूल अस्पतालों में नहीं लौटे हैं। डॉक्टरों की कमी को देखते हुए फिलहाल महिला और जिला अस्पताल में संबद्ध एक-एक डॉक्टरों को इमरजेंसी ड्यूटी के लिए रोका गया है, जबकि धौलादेवी ब्लॉक के चलनीछीना में मूल पद पर भेजने के बाद डॉक्टर का स्थानांतरण हो गया। कार्यमुक्त एक अन्य डॉक्टर को मूल पद पर बेस अस्पताल में तैनाती मिली पर उन्हें भी महिला अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर भेजा गया है।
इन अस्पतालों के लिए आदेश जारी
अल्मोड़ा। सूत्रों के अनुसार सात अटैच डॉक्टरों को धामस, चौखुटिया, चनौदा, द्वाराहाट, चितई, चलनीछीना और बेस अस्पताल में मूल पदों पर तैनाती के आदेश जारी हुए थे। इनमें से द्वाराहाट और चितई दो अस्पतालों में डॉक्टर तैनात होने से लाभ मिला है। बेस अस्पताल में मूल पद में तैनात डॉक्टर को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर महिला अस्पताल भेजा गया है। चलनीछीना में मूल पद तैनाती पर डॉक्टर का स्थानांतरण अन्य जिले के लिए हो गया है।
पिछले माह सात डॉक्टरों को मूल पदों पर तैनाती के आदेश जारी हुए। इनमें से सात को अवमुक्त किया गया है, जबकि दो डॉक्टरों को इमरजेंसी स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण अभी रोका गया है।
- डॉ. सविता ह्यांकी, सीएमओ अल्मोड़ा।