रानीखेत (अल्मोड़ा)। छह तहसीलों को जोड़ने वाले रानीखेत के एकमात्र बड़े राजकीय अस्पताल की व्यवस्थाएं राम भरोसे चल रही हैं। अस्पताल में अधिकतर डॉक्टरों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। पिछले सवा साल से फिजीशियन की तैनाती तक नहीं हो सकी है। स्थायी रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण लोगों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। कोरोनाकाल में भी अस्पतालों की स्थिति नहीं सुधरने से लोगों में भी आक्रोश है।
मालूम हो कि राजकीय अस्पताल में रानीखेत के अलावा भिकियासैंण, सल्ट, स्याल्दे, देघाट, सराईखेत, द्वाराहाट, चौखुटिया, कर्णप्रयाग क्षेत्र से रोगी पहुंचते हैं।अस्पताल में प्रतिदिन 250 से 300 रोगी उपचार को आते हैं, लेकिन रोगियों को यहां आकर जब संबंधित डॉक्टर नहीं मिलते तो बड़ी फजीहत होती है। पिछले डेढ़ साल से फिजीशियन की तैनाती नहीं हो सकी है। जिस कारण गंभीर रोगियों को रेफर तक करना पड़ता है। अस्पताल में वर्तमान में रेडियोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, ईएनटी आदि के पद रिक्त हैं। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डीएस नेई के पास रेडियोलॉजिस्ट का भी चार्ज है। कोरोनाकाल में यहां अल्ट्रासाउंड नहीं होने की शिकायतें हैं।
उपमंडल क्षेत्र का एकमात्र राजकीय अस्पताल, और सवा साल से वहां फिजीशियन का नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की बात कहती है। जब अस्पताल में फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट नहीं होगा तो आम लोग उपचार को कहां जाएंगे। इस पर सरकार को सोचना चाहिए।
-भगवंत नेगी, अध्यक्ष व्यापार मंडल रानीखेत।
गैरसैंण, सराईखेत जैसे दूरस्थ इलाकों से पहुंच रहे लोगों के अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहे हैं। जरूरी बाजार स्थित निजी क्लीनिक भी सील के चलते बंद हैं। लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। जो कि बेहद गंभीर मसला है। इस संबंध में शीघ्र ही शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से मिलने जाएगा।
-हर्ष पंत, महासचिव, व्यापार संघ रानीखेत।
बड़े क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले रानीखेत राजकीय अस्पताल की व्यवस्थाएं चौपट हैं। सवा साल में भी फिजीशियन तैनात नहीं होना, सिस्टम की खामियों को उजागर कर रहा है। स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती करनी भी जरूरी है। अल्ट्रासाउंड के लिए लोग परेशान हो रहे हैं। आईसीयू, वैंटिलेटर तक बड़े अस्पतालों में नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
-दिनेश तिवारी, पूर्व उपाध्यक्ष, विधि आयोग।
किसी वक्त रानीखेत राजकीय अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों सहित भरा पूरा स्टाफ था, लेकिन वर्तमान में हालात जुदा हैं। सरकारों ने अस्पतालों का ध्यान नहीं दिया। विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने से आए दिन उपचार के लिए लोगों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं। फिजीशियन की तैनाती तो कम से कम सरकार को करनी चाहिए थी।
-आनंद अग्रवाल, सामाजिक कार्यकर्ता रानीखेत।