जीर्ण हालत में अल्मोड़ा का एक नौला।
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गर्मी में लोगों की प्यास बुझाने वाले नौलों का अस्तित्व खतरे में है। एक जमाने में अल्मोड़ा में 200 से अधिक नौले थे, लेकिन अब करीब 40 नौलों में ही थोड़ा बहुत पानी बचा है, जिनका जीर्णोद्धार करके पानी को लोगों तक पहुंचाया जा सकता है, लेकिन बचे हुए नौलों के संरक्षण की जिम्मेदारी किसी विभाग को नहीं सौंपी गई है। जिससे बचे खुचे नौले भी एक न एक दिन बरबाद हो जाएंगे।
सांस्कृतिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध अल्मोड़ा में कभी 200 से अधिक नौले थे। हर मोहल्ले के आसपास कोई न कोई पानी का नौला मौजूद था, लेकिन आबादी बढ़ने के साथ मकान भी उसी रफ्तार से बने। इन नौलों की तरफ किसी का ध्यान नहीं गया। उल्टा कई जगह नौलों के पास की जमीन लोगों ने कब्जा कर ली और धीरे-धीरे नौले भी बरबाद होते चले गए। इससे अधिकांश नौले या तो खंडहर में तब्दील हो गए या फिर इन नौलों का पानी ही सूख गया। जिला प्रशासन द्वारा हाल में कराए गए एक सर्वे से पता चला है कि वर्तमान में भी करीब 40 नौलों में थोड़ा बहुत पानी बचा हुआ है।
मालूम हो कि बरसात में कोसी में बाढ़ आने अथवा अधिक गर्मी के बाद नदी में पानी की कमी होने पर लोग इन नौलों की तरफ ही दौड़ लगाते हैं, लेकिन इन प्राकृतिक नौलों के देखरेख की जिम्मेदारी किसी विभाग को नहीं सौंपी गई है। जिससे बचे हुए नौलों का अस्तित्व भी संकट में है।
डीएम के प्रयासों से तीन नौलों का हुआ सुधारीकरण
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा के इन नौलों की उपयोगिता को देखते हुए बीते साल जिलाधिकारी सविन बंसल ने विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान और जीबी पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान के वै
ज्ञानिकों की मदद लेकर नौलों के संरक्षण की योजना तैयार की है। उन्होंने इसके लिए बकायदा एक समिति का गठन भी करवाया है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता नंद किशोर ने बताया कि पहले चरण में नगर के 10 से 12 नौलों के सुधारीकरण की योजना बनाई गई थी। इसमें राजनौला, धारानौला और एनटीडी में स्थित नौलों का जीणोद्धार कर दिया गया है।