अल्मोड़ा। नई शिक्षा नीति के तहत सोबन सिंह विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के कौशल को निखार कर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के लिए इस शिक्षा सत्र से कौशल संवर्धन, मूल्य योजना, क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम संचालित हुए। यहां लेकिन न तो विद्यार्थियों के पास इन पाठ्यक्रमों की पुस्तकें हैं और न ही विषय विशेषज्ञ। विद्यार्थियों को सिर्फ सफल उद्यमी बनने के सपने दिखाए जा रहे हैं लेकिन सपने जिए नहीं जाते। ऐसे मेें विद्यार्थियों के कौशल को विकसित करने के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं।
एसएसजे विश्वविद्यालय में कौशल संवर्धन पाठ्यक्रम में ज्योतिष शास्त्र, मशरूम उत्पादन, केंचुआ पालन, नर्सरी तकनीक, जलवायु परिवर्तन शमन और अनुकूलन, हिंदुस्तानी संगीत का बुनियादी ज्ञान सहित 26 विषयों को शामिल किया गया है। इसका मकसद विद्यार्थियों के कौशल को विकसित करना है ताकि वह सफल उद्यमी बनने का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।
इसके साथ ही उनमें संगठनात्मक मूल्यों और नेतृत्व की क्षमता विकसित करने के लिए मूल्य योजन और क्षमता संवर्धन पाठ्यक्रम भी संचालित किए गए। लेकिन विद्यार्थियों को इन विषयों का ज्ञान देने के लिए विवि में कोई विषय विशेष नहीं है। हालात ये है कि विद्यार्थियों के पास इन विषयों की पुस्तकें तक नहीं हैं।
मौखिक और प्रयोगात्मक परीक्षा देनी होगी
संसाधनों के अभाव के बीच विवि प्रबंधन ने इन विषयों की मौखिक और प्रयोगात्मक परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। मौखिक और प्रयोगात्मक परीक्षा के लिए 50 अंक निर्धारित किए गए हैं। विद्यार्थी को इन विषय को उत्तीर्ण करने के लिए हर हाल में दो क्रेडिट हासिल करने होंगे। तभी विद्यार्थी परीक्षा में उत्तीर्ण माने जाएंगे।
वर्जन
- एनईपी पाठ्यक्रम को सिलेबस तैयार करने की जिम्मेदारी कुमाऊं विवि नैनीताल को दे गई थी। विद्यार्थियों को संबंधित विषय की पुस्तकें उपलब्ध कराने और विषय विशेषज्ञों की तैनाती के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है।
-डॉ. डीएस धामी, समन्वयक, एनईपी, एसएसजे विवि अल्मोड़ा