नुमाइशखेत मैदान का एतिहासिक महत्व है। इसके स्वरूप को बचाने के लिए कारगर पहल की दरकार है। विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने नगर पालिका परिषद से प्रवेश द्वार की सीढ़ी के निर्माण पर लगी रोक के मामले में न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखने को कहा हैै।
मालूम हो कि आजादी के आंदोलन के दौरान कूर्मांचल में कुली उतार आंदोलन को मिली सफलता के बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 21 जून 1921 को यहां आए थे। उन्होंने नुमाइशखेत मैदान में सभा के दौरान आंदोलन की सफलता के लिए क्षेत्र के लोगों को धन्यवाद बोला था। तभी से इस मैदान का एतिहासिक महत्व बढ़ गया। मैदान के उत्तर और पूरब में रिहायशी इलाके हैं। इसी मैदान में उत्तरायणी मेला लगने के साथ ही समय-समय पर खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जाती हैं।
मैदान में अन्य कार्यक्रम भी हुआ करते हैं। मैदान के सुंदरीकरण और संरक्षित करने के लिए कई बार आवाज उठाई गईं। नगर पालिका ने पिछले दिनों बोर्ड बैठक में मैदान के सुंदरीकरण का प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव के अनुसार मैदान में तीन प्रवेश द्वार बनाकर उनमें वाहनों के अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगाने के सीढ़ियों का निर्माण किया जाए और मैदान में हरियाली लायी जाए।
मैदान रिहायशी इलाके से जुड़ा होने के कारण आसपास के कुछ लोगों ने अधिकारों का हनन बताते हुए न्यायालय में याचिका दायर कर निर्माण पर रोक लगाने की मांग की। न्यायालय ने नगर पालिका को अग्रिम आदेशों तक निर्माण पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। निर्माण अभी रूका है। मैदानों में दोपहिए और चौपहिए वाहनों का आना-जाना बेेरोकटोक जारी है।
यूथ कांग्रेस के विधानसभा क्षेत्र के अध्यक्ष ईश्वर पांडे, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष भाष्कर टम्टा और भाजयुमो के नगर अध्यक्ष धीरज परिहार समेत कई अन्य लोगों ने नगर पालिका परिषद से मैदान के स्वरूप को बचाने के लिए प्रवेश द्वारों पर सीढ़ियों का निर्माण करके वाहनों के प्रवेश पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। इधर नगर पालिकाध्यक्ष गीता रावल ने कहा कि मामला न्यायालय के विचाराधीन चल रहा है। पालिका मामले में मजबूत से पैरवी करेगी।