अल्मोड़ा। मानसून के सक्रिय होते ही प्रशासन ने आपदा से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। कुमाऊं के किसी भी जिले में आपदा की स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ के 42 जवानों को अल्मोड़ा के भैसवाड़ा फार्म में तैनात किया गया है।
जबकि अल्मोड़ा जिले में एसडीआरएफ के 15 जवानों के अलावा हर तहसील और थाना स्तर पर भी टीमें गठित की गई हैं। अल्मोड़ा में एक वाहन को विशेष तौर पर आपदा से निपटने के लिए उपकरणों से सुसज्जित करके तैयार रखा गया है। जिले में तहसील और थाना स्तर पर भी टीमें बनाई गई हैं।
एनडीआरएफ की टीम में 42 जवान तैनात हैं। इन्हें कुमाऊं के किसी भी जिले में आपदा की घटनाओं से निपटने के लिए भेजा जा सकेगा। इसके अलावा जिले में एसडीआरएफ के 15 जवान और आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के छह प्रशिक्षित कर्मचारी भी हैं।
जिलाधिकारी सविन बंसल के विशेष प्रयासों से आपदा से निपटने के लिए एक वाहन को भी विभिन्न उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। इस वाहन में वुड कटर, कंक्रीट कटर, हाइड्रोलिक कटर, हाइड्रोलिक स्प्रेडर, स्ट्रेचर, लाइटें, चट्टानों में उतरने और चढ़ने के लिए रोप सहित कई अन्य सुविधाएं हैं। जिले के किसी भी इलाके से आपदा की घटना होने पर 10 मिनट के भीतर टीमें रवाना हो जाएंगी।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी राकेश जोशी ने बताया कि जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर अल्मोड़ा और रानीखेत में क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी)बनाई गई हैं। इसके अलावा हर थाने में भी आपदा को लेकर एक-एक टीम बनाई गई है। तहसील मुख्यालयों में भी कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। इन टीमों में राजस्व कर्मियों के अलावा पीआरडी और होमगार्ड के जवानों को शामिल किया गया है।
अल्मोड़ा। जिलाधिकारी सविन बंसल ने मानसून के दौरान जिले के सभी विभागों के अधिकारियों को बगैर अनुमति के अवकाश में जाने पर रोक लगा दी है। साथ ही उन्होंने कहा है कि सभी अधिकारी-कर्मचारी मानसून सीजन के दौरान अपने मोबाइल हर वक्त ऑन रखेंगे।