बसभीड़ा में नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन की 31वीं वर्षगांठ के मौके पर हुई गोष्ठी में नशा मुक्त उत्तराखंड का संकल्प लिया गया। वक्ताओं ने कहा कि राज्य को शहीदों के सपनों के अनुरूप बनाने के लिए सभी को जुटना होगा।
गोष्ठी में जल, जंगल जमीन से लेकर जनता से जुडे़ हर मुद्दे पर चर्चा हुई। आंदोलन की पृष्ठभूमि को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन के इतने साल के बाद भी नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन की सार्थकता बरकरार है। कहा कि आंदोलन आज भी माफियाराज को चुनौती देते आ रहा है।
गोष्ठी में मुख्य संयोजक पीसी तिवारी ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में शराब, भू, खनन व चरस माफियाओं के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य माफिया से भी नई चुनौती खड़ी हो गई है। कहा कि हम सबको मिलकर समाज के दुश्मनों से लोहा लेना होगा।
गोष्ठी में दीवान सिंह बिष्ट, जीवन चंद्र, मोहन सिंह किरौला, धीरज तिवारी, ललित चौधरी, कमला देवी, माधोसिंह भंडारी, जमन सिंह मनराल, प्रेम आर्या, ललित बिष्ट, कमल हर्बोला, राजेंद्र तिवारी, ललित दुर्गापाल, मोहन तिवारी, महेश तिवारी तथा नंदा बलभ तिवारी आदि मौजूद थे। संचालन बालादत्त तिवारी ने किया।