कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद के जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर यहां शिक्षा, साहित्य और प्रेमचंद की प्रासंगिकता विषय पर हुए सेमिनार में मुख्य वक्ता वरिष्ठ साहित्यकार और एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के प्रो. देव सिंह पोखरिया ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद भविष्यद्रष्टा साहित्यकार थे। प्रेमचंद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित थे। गांधी ने जो काम राजनीति क्षेत्र में किया प्रेमचंद ने साहित्य क्षेत्र में किया।
प्रो. पोखरिया ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने हिंदी, उर्दू, अरबी, फारसी भाषाओं को बराबर महत्व दिया। प्रेमचंद की सबसे बडी विशेषता सांप्रदायिक सौहार्द और भाषायी एकता है। वह मानते थे हिंदी, उर्दू अलग-अलग भाषाएं नहीं हैं। उन्होंने उर्दू में पहली कहानी परीक्षा लिखी थी। उर्दू साहित्य जगत में प्रेमचंद का वही सम्मान है जो हिंदी में है। उनकी उर्दू में लिखी ईदगाह, करबला कहानियां भाषाई सौहार्द की प्रतीक हैं।
प्रेमचंद भविष्यदृष्टा साहित्यकार थे। उनका लिखा गया साहित्य आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने सरल से सरल हिंदुस्तानी भाषा इजाद की। किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। आज भी देश में किसानों की समस्याएं वैसी ही हैं। प्रेमचंद ने घीसू, माधव, हल्कू आदि पात्रों के माध्यम से समाज के विविध पहलुओं को उजागर किया है।
इस मौके पर डा. दीवान नगरकोटी, जीसी जोशी, उप शिक्षा धिकारी धौलादेवी रश्मि पंत, डायट के प्रवक्ता डा. हरीश जोशी, डा. जीएस गैड़ा, युगल मठपाल, बीआरसी लगमड़ा संजय जोशी, बीआरसी धौलादेवी हेम भट्ट, रमसा जिला समन्वयक विनोद राठौर, भगवत बगड़वाल, कल्याण सिंह मनकोटी आदि उपस्थित थे।