अल्मोड़ा। राज्य और केंद्र सरकार के कई विभागों के पास सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी है। इनमें से एनएच की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है। इसलिए नगर से गुजरने वाली तीन महत्वपूर्ण सड़कों को केंद्र सरकार ने नेशनल हाइवे बनाया है लेकिन तकनीकी खामियों के कारण नगर क्षेत्र में करीब 25 किमी लंबी तीन सड़कें किसी भी एनएच से नहीं जुड़ सकी हैं।
इससे नगर की आंतरिक सड़कों की हालत खराब है। लोनिवि के अधिकारी अकसर बजट की कमी बताते हैं। जिला मुख्यालय से गुजरने वाली ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग, शैलबैंड-ताकुला-बागेश्वर-कपकोट, एनटीडी-पनार-घाट सड़कें एनएच के अधीन हैं। ज्योलीकोट-कर्णप्रयाग हाइवे अल्मोड़ा नगर में तल्ला-पांडेखोला से रानीखेत होकर गैरसैंण निकल जाता है। बागेश्वर-कपकोट जाने वाला एनएच शैलबैंड में आकर समाप्त हो जाता है।
पनार-घाट एनएच एनटीडी के किमी पांच तक ही है। यह दोनों सड़कें किसी भी नेशनल हाईवे से सीधे नहीं जुड़ी हैं। इस तरह नगर में करबला के पास बेस तिराहे से एनटीडी तक करीब 15 किमी, पांडेखोला से शैल बैंड और एनटीडी तक करीब दस किमी सड़क किसी भी एनएच में शामिल नहीं है।
नगर क्षेत्र में सड़कों का यह हिस्सा लोनिवि का है। इस कारण सड़क के इस भाग के लिए पर्याप्त बजट भी नहीं मिल पाता। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सनवाल ने कहा कि एनएच के अधीन आने पर आंतरिक सड़कों के रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध हो सकता है लेकिन नगर की सड़कों को एनएच से बाहर रखा गया है। उन्होंने पांडेखोला-शैलबैंड-एनटीडी तक आंतरिक सड़क को एनएच घोषित करने की मांग की है।