नगर में लावारिस कुत्तों, बंदरों और जंगली जानवरों के आतंक से छुटकारा दिलाने की मांग को लेकर महिला कल्याण संस्था ने आम लोगों का सहयोग लेकर 22 नवंबर से आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। महिला कल्याण संस्था की अध्यक्ष रीता दुर्गापाल ने पत्रकारों को बताया कि लोग बंदरों, कुत्तों और जंगली जानवरों से छुटकारा दिलाने की मांग लंबे समय से उठा रहे हैं लेकिन, आज तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस कारण अब संस्था ने आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि संस्था कई बार जिला प्रशासन और सरकार को ज्ञापन दे चुकी है, लेकिन संस्था को हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। नगर में बंदरों, लावारिस कुत्तों की संख्या इतनी अधिक बढ़ गई है कि अब हर मोहल्लों में इनका आतंक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि बंदरों को पकड़ने के लिए धनराशि मिली थी पर बंदरों को पकड़ कर कुछ दूर ले जाकर छोड़ दिया गया। बंदरबाड़े के साथ ही ऑपरेशन थियेटर बनाने की बात लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इस पर अमल नहीं हो रहा है। नगर में बंदर कई लोगों को काट चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही स्थिति है।
उन्होंने कहा कि राज्य बनने के बाद सरकारों ने जंगली जानवरों के आतंक से लोगों को छुटकारा दिलाने के लिए कोई ठोस समाधान नहीं निकाला। उन्होंने बताया कि जंगली जानवरों के आतंक से छुटकारा दिलाने की मांग को लेकर संस्था 22 नवंबर से चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में धरना देगी। इस मौके पर उनके साथ उपाध्यक्ष चंद्रा अग्रवाल, मंजू अग्रवाल, सचिव पुष्पा सती, उप सचिव राधिका जोशी, कोषाध्यक्ष सुनैना मेहरा, आशा पंत, निर्मला जोशी, इंद्रा लोहनी, रीता जोशी, शांति शाह, दीपा जोशी, सरला बिष्ट, कल्पना जोशी, अनीता रावत, गीता साह आदि मौजूद थे।