समय पर इलाज न मिलने पर प्रसव पीड़ा से जूझ रही कर्मी गांव की महिला की कपकोट अस्पताल पहुंचते ही मौत हो गई। बच्चे ने भी पेट में ही दम तोड़ दिया। स्वास्थ्य कर्मियों ने पेट काटकर बच्चे को निकाला। क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने इस पर दुख जताते हुए गांवों में भी प्रसव सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की मांग की है।
सामाजिक कार्यकर्ता गोकुल सिंह देव ने बताया कि कर्मी निवासी भूपेंद्र सिंह की पत्नी 26 वर्षीय ऊषा देवी को प्रसव पीड़ा होने पर 108 एंबुलेंस से कपकोट लाया गया। अस्पताल पहुंचते ही उसकी मौत हो गई। जिला पंचायत सदस्य हरीश ऐंठानी, विधायक ललित फर्स्वाण, एडवोकेट चामू सिंह देवली, नरेंद्र दानू सहित तमाम लोगों ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
डाक्टर होती तो बच जाती जच्चा-बच्चा की जान
कपकोट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसूति रोग चिकित्सक मौजूद होती तो कर्मी निवासी ऊषा देवी और उसके शिशु की अकाल मौत नहीं होती। कपकोट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर दो नियमित और पीपीपी मोड से चार संविदा चिकित्सक कार्यरत हैं। लंबे समय बाद पिछले दिनों यहां प्रसूति रोग चिकित्सक की तैनाती हुई। दुर्भाग्यवश इन दिनों वह अवकाश पर हैं। उन्हें 30 जनवरी को वापस आना है। कर्मी से ऊषा देवी को 108 से लाया गया, लेकिन यहां डाक्टर नहीं होने केे कारण उन्हें उपचार नहीं मिल सका और यहां कुछ ही देर बाद उनकी मृत्यु हो गई।