जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जीआईसी अल्मोड़ा में आयोजित विधिक साक्षरता शिविर में अतिरिक्त जिला जज ओम कुमार ने कहा कि असंगठित क्षेत्र में ज्यादातर श्रम कानून लागू नहीं होते हैं। इसमें काम करने वालों की दशा दयनीय है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की बालिका या 21 वर्ष से कम आयु के बालक की शादी करना कानूनन अपराध है। यदि किसी बालक-बालिका के माता-पिता अथवा रिश्तेदार या पंडित कोई भी 18 और 21 वर्ष से कम आयु में शादी कराने में जोर देता है तो वह कानूनन सजा का भागीदार होगा।
उन्होंने बताया कि बाल विवाह के आरोपियों को दो साल तक का कठोर कारावास अथवा एक लाख तक का जुर्माना अथवा दोनों हो सकते हैं। बाल विवाह कानून के अंतर्गत किसी महिला को कारावास में सजा नहीं दी जा सकती है। इस अधिनियम के अंतर्गत सभी अपराध संज्ञेय और गैर जमानती हैं। प्राधिकरण के सचिव डा. शेष चंद्र ने कहा कि बालकों का लैंगिक शोषण और लैंगिक दुरुपयोग जघन्य अपराध है।
उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा की शिकार हो रही महिला अथवा संरक्षण अधिकारी या जो व्यक्ति इस प्रकार की गतिविधियों को देख रहा है मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकता है। एडीजीसी क्रिमिनल एससी नैलवाल ने घरेलू हिंसा अधिनियम तथा पॉक्सो अधिनियम के बारे में जानकारी दी।
एडीजीसी सिविल गोधन सिंह ने ज्यवेनाईल जस्टिस अधिनियम के बारे में बताया। महिला बाल स्वास्थ्य सदस्य हेमलता भट्ट ने कहा कि स्कूली बच्चों को सावधान और सतर्क रहना चाहिए कि कोई उनके बैग में नशीले पदार्थों को प्रविष्ठ कराकर उन्हें संवाहक के रूप में इस्तेमाल न कर ले। प्रभारी निरीक्षक चंद्र मोहन सिंह ने मोटर वाहन के संबंध में छात्र-छात्राओं को जानकारी दी। इस मौके पर छात्र-छात्राओं को एक हजार सरल कानूनी ज्ञान माला पुस्तकें वितरित की गई। कार्यक्रम में विनीता आर्या, सुनीता रानी, भावना आर्या, विनीता आर्या मौजूद थे।