हवालबाग के कनालबुंगा में स्थापित मधुमक्खी बॉक्स।
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मधुमक्खी पालन से कमा रहीं सालाना सात लाख रुपये, राज्यपाल और स्टार्टअप इंडिया से हो चुकी हैं सम्मानित
अल्मोड़ा। हवालबाग ब्लॉक के कनालबुंगा गांव निवासी निर्मला फर्त्याल ने खुद को आत्मनिर्भर किया और 60 से अधिक महिलाओं को रोजगार दिया।कोरोना काल में दिल्ली से लौटकर गांव में रहकर स्वरोजगार की राह चुनी और आज मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में एक मिसाल कायम की है।
निर्मला फर्त्याल ने बताया कि उन्होंने कोरोना काल में महज तीन मधुमक्खी बक्सों से इस कार्य की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे मेहनत और प्रशिक्षण के बल पर उन्होंने इसे बढ़ाकर 350 बक्सों तक पहुंचाया। उन्होंने हल्द्वानी और जीबी पंत पर्यावरण संस्थान से दो सप्ताह का प्रशिक्षण लिया और उद्यान विभाग से सात लाख रुपये का ऋण लेकर इस व्यवसाय को शुरू किया। उनका कहना है कि अप्रैल से जून के बीच पांच क्विंटल तक शहद का उत्पादन होता है, जिससे सालाना लगभग छह से सात लाख रुपये की आमदनी होती है। इस व्यवसाय से उन्होंने 60 से अधिक महिलाओं को भी जोड़ा है। उन्होंने बताया कि उनके इस कार्य में उनके पति नारायण फर्त्याल उनका सहयोग करते हैं।
राज्यपाल और सीएम कर चुके हैं सम्मानित
अल्मोड़ा। निर्मला फर्त्याल और उनके पति नारायण फर्त्याल ने बताया कि आजीविका योजना के तहत उन्हें दो लाख 40 हजार रुपये की सहायता भी मिली है। इसके अलावा राज्यपाल, सीएम और स्टार्टअप इंडिया से सम्मानित कर चुके हैं। उनका कहना है कि पहाड़ में अपार संभावनाएं हैं कोई भी महिला या युवा स्वरोजगार कर अपने जीवन को बदल सकता है। संवाद
कोट -महिलाओं को मधुमक्खी पालन से जोड़ा गया है। उन्हें समय-समय पर प्रशिक्षण दिलाकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जाता है। निर्मला फर्त्याल शहद उत्पादन के क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही हैं। -रहमद हुसैन, ब्लॉक मिशन प्रबंधक राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ।