अल्मोड़ा। पौष्टिक अनाज के रूप में पहचाने जाने वाला मक्का जल्द ही नई किस्म का मिलेगा। जिसमें और भी अधिक पोषक तत्व मौजूद होंगे। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान समेत भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा, आचार्य एनजी रंगा तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय राजेंद्रनगर हैदराबाद, हिमाचल स्थित कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के वैज्ञानिक देश में पहली बार मक्के में न्यूट्रीशन बढ़ाने का अभिनव प्रयोग कर रहे हैं। पूसा के पूर्व डायरेक्टर डॉ. हरिशंकर गुप्ता की पहल पर शुरू किए गए इस प्रयोग में देशभर के करीब दस वैज्ञानिक काम कर रहे हैं।
2009-10 में विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने बायोटेक्नोलॉजी पद्धति से भारत का सबसे पहला क्वालिटी प्रोटीन मक्का विवेक-क्यूपीएम-9 तैयार किया था, जो कि उत्तराखंड के अलावा नॉर्थ-ईस्ट के प्रदेशों में आज भी प्रसिद्ध है।
वीपीकेएस संस्थान के डायरेक्टर डॉ. अरुणव पटनायक ने बताया कि अब देश में पहली बार मक्के में बेहतर पोषक तत्व के लिए काम किया जा रहा है। जिसमें पूसा, वीपीकेएस, हैदराबाद, पालमपुर के वैज्ञानिक मिलकर काम कर रहे हैं, जिसमें मक्के की नई किस्म देखी जाएगी। फिर ऑल इंडिया टेस्टिंग होने के बाद इन सभी संस्थानों में इसकी गुणवत्ता जांची जाएगी। इसके बाद इसमें जो भी अच्छा पोषक तत्व होगा उसी को पूरे देश में फैलाया जाएगा।
आयुर्वेद के अनुसार मक्का तृप्तिदायक, वातकारक, कफ, पित्तनाशक अनाज है। मक्के में फोलिक एसिड, प्रोटीन, कार्बोहाईड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। यही नहीं मक्के के पीले दानों में मैग्नीशियम, आयरन, कॉपर, फास्फोरस भी मिलता है। जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं और बुढ़ापे में हड्डियों के टूटने की संभावना भी कम होती है। यह गुर्दों की कमजोरी, पेट का कैंसर कम करने में भी लाभदायक है। गर्भवती महिलाओं के लिए मक्का बेहद कारगर है।