यदि आप बंदरों को मूंगफली, ब्रेड या फल खिलाने के शौकीन हैं तो संभल जाइए। बंदरों को खाद्य सामग्री देना किसी के लिए भी महंगा पड़ सकता है। खाद्य सामग्री देते हुए पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वन विभाग की ओर से कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मालूम हो कि गांव से लेकर शहरों तक बंदर बड़ी समस्या बन चुके हैं। कई लोग शहरी क्षेत्रों में मंदिर परिसर, पुल या चौराहों पर बैठे रहने वाले बंदरों को शौक से खाद्य सामग्री दे देते हैं। कुछ मोहल्लों में लोग रात का बचा खाना भी बंदरों के लिए छतों में छोड़ देते हैं। भोजन मिलने से आबादी की ओर रुख कर रहे बंदर अब लोगों के लिए मुसीबत बनने लगे हैं।
बागेश्वर के प्रभागीय वनाधिकारी एमबी सिंह का कहना है कि उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत बंदरों की समस्या के निराकरण के लिए वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत बंदरों को खाद्य सामग्री दिया जाना प्रतिबंधित है। बंदरों को खाद्य सामग्री देने वाले लोगों या संस्थाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से बंदरों को किसी भी तरह की खाद्य सामग्री नहीं देने को कहा है।