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स्वामी विवेकानंद ने अल्मोड़ा के लोगों को दिया था एकता का मूलमंत्र

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अल्मोड़ा के खजांची मोहल्ला में स्व. बद्री शाह के इसी घर में मेहमान बनकर रहे थे स्वामी विवेकानंद। - फोटो : ALMORA
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राजेंद्र धानक
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अल्मोड़ा। राष्ट्र निर्माण को जीवन का उद्देश्य मानने वाले स्वामी विवेकानंद का सांस्कृतिक नगरी से भी नाता रहा है। स्वामी विवेकानंद दो बार अल्मोड़ा आए और कई दिनों तक यहां रहकर साधना की। उन्होंने 11 मई 1897 के दिन खजांची बाजार में जनसमूह को संबोधित कर लोगों को एकता का संदेश दिया था। स्वामी विवेकानंद खजांची मोहल्ले में स्व. बद्री शाह के मेहमान बनकर रहे थे। वह वर्ष 1890 और 1897 में स्व. शाह के घर आए थे। इस मकान में आज भी विवेकानंद के निवास करने संबंधी पट्टिका लगी है।
स्वामी विवेकानंद जब दूसरी बार अल्मोड़ा पहुंचे तो उनके आगमन के लिए पूरे नगर को सजाया गया था। लोधिया से एक सुसज्जित घोड़े पर उन्हें नगर में लाया गया। उनके शहर पहुंचने पर नगर के लोगों ने भव्य स्वागत किया था। 11 मई 1897 को खजांची बाजार में उन्होंने जन समूह को संबोधित किया। स्वामी के ओजस्वी विचारों को सुनने के लिए तब पांच हजार लोग आए थे। स्वामी ने यहां कहा था यह वही भूमि है, जहां रहने की कल्पना वह अपने बाल्यकाल से ही कर रहे थे। उनके मन में हिमालय में एक केंद्र स्थापित करने का विचार था।
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अन्य स्थानों की तुलना में उन्होंने इसी स्थान को सार्वभौमिक धर्मशिक्षा के एक प्रधान केंद्र के रूप में चुना है। यह वह पवित्र स्थान है जहां भारत का प्रत्येक सच्चा धर्मपिपासु व्यक्ति अपने जीवन का अंतिम काल बिताने का इच्छुक रहता है। इन पहाड़ों के साथ कई श्रेष्ठतम स्मृतियां जुड़ीं हैं। यदि धार्मिक भारत के इतिहास से हिमालय को निकाल दिया जाए तो उसका अत्यल्प ही बचा रहेगा। इसलिए यहां एक केंद्र अवश्य होना चाहिए। यह केंद्र केवल कर्म प्रधान न होगा, बल्कि यहीं निस्तब्धता, ध्यान और शांति की प्रधानता होगी। एक न एक दिन वह इस केंद्र को यहां स्थापित कर सकेंगे, ऐसी उन्हें उम्मीद थी।
जान बचाने वाले फकीर को दिए दो रुपये
अल्मोड़ा। यहां हुए अभिनंदन समारोह में वह फकीर भी पहुंचे थे जिन्होंने खीरा खिलाकर स्वामी की जान बचाई थी। फकीर को देखते ही स्वामी विवेकानंद उन्हें पहचान गए। उन्होंने फकीर को दो रुपये दिए। वर्ष 1890 की हिमालय यात्रा के दौरान करबला के पास स्वामी के अचेत होने पर फकीर ने उन्हें खीरा खिलाया था। इससे वह पुन: जाग गए और उनकी जान बच गई थी।
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तीन बार विभिन्न सभागारों में दिए थे व्याख्यान
अल्मोड़ा। वर्ष 1897 के भ्रमण के दौरान स्वामी विवेकानंद करीब तीन माह तक देवलधार और अल्मोड़ा में रहे। इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों के आग्रह पर अल्मोड़ा में तीन बार विभिन्न सभागारों में भी व्याख्यान दिया। तब उनके व्याख्यानों में भारी जनसमूह उमड़ पड़ा था। दो अगस्त 1897 में स्वामी विवेकानंद मैदानी क्षेत्र की तरफ लौट गए।
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