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सिसौंण की सब्जी, भट्ट का जौला और मडुवे के बिस्किट ने लूटी वाहवाही

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मुझोली गांव में पारंपरिक भोजन परोसती महिलाएं। - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। तहसील के सुदूरवर्ती मुझोली गांव में पारंपरिक फसल और खाद्य विविधता मेले का आयोजन किया गया। इस दौरान स्थानीय व्यंजनों पर आधारित पाक कला प्रतियोगिता भी हुई। भट्ट का जौला, भांग की झोली और सिसौंण की सब्जी आदि व्यंजनों का लोगों ने जमकर लुत्फ उठाया।
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बायोवर्सिटी इंटरनेशनल के सहयोग से लोक चेतना मंच और विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान हवालबाग द्वारा आयोजित इस मेले में क्षेत्र के 12 गांवों की 42 महिलाओं ने परंपरागत व्यंजन बनाए। पाक कला प्रतियोगिता में उजगल गांव की माया भंडारी ने मडुवे के बिस्कुट, खजूर और झुंगरे की खीर को पहला स्थान मिला। उन्हें पांच हजार, ऐना गांव की भगवती भंडारी को सिसौंण की सब्जी के लिए दूसरा और तीन हजार और मुझोली की आशा देवी को भट्ट का जौला, भांग की झोली और बड़े के लिए तीसरा स्थान मिला। उन्हें दो हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। मुझोली की ललिता राणा को सान्त्वना पुरस्कार मिला।
लोक चेतना मंच के अध्यक्ष जोगेंद्र बिष्ट, कृषि अनुसंधान संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा भारतीय, डॉ. आरएस पाल, अजेय रस्तोगी, सरपंच कृष्णा परिहार ने पुरस्कार बांटे। निर्णायक अजेय रस्तोगी, डॉ आरएस पाल, श्याम सिंह और जयदेव गिरि थे।
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इस मौके पर लोक चेतना मंच के पंकज चौहान, आनंद जलाल, अनुसंधान संस्थान के डॉ. जितेंद्र, हेमलता जोशी आदि उपस्थित थे। लोक चेतना मंच के अध्यक्ष जोगेंद्र बिष्ट ने बताया कि इस तरह के आयोजनों से परंपरागत खेती को बढ़ावा मिलेगा।
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