नक्सलवाद का अनुभव है उपन्यास ‘लाल लकीर’
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। नक्सल प्रभावित क्षेत्र के अनुभवों को पत्रकार हृदयेश जोशी ने अपने नए उपन्यास लाल लकीर में उकेरा है। इस उपन्यास में छत्तीसगढ़ क्षेत्र की संस्कृति और नक्सलवाद के बारे में विस्तृत व्याख्या की गई है। उपन्यास का विमोचन यहां नौ सेना के पूर्व एडमिरल डीके जोशी और पूर्व ले.जनरल मोहन चंद्र भंडारी ने किया। मालूम हो कि पत्रकार जोशी दो साल पूर्व केदारनाथ त्रासदी पर तुम चुप क्यों रहे केदार शीर्षक पुस्तक लिख चुके हैं।
यहां रानीखेत क्लब में पुस्तक का विमोचन करते हुए अतिथियों ने कहा कि नक्सलवाद नासूर बन चुका है। पत्रकार जोशी की लाल लकीर नक्सलवाद के बारे में विस्त़ृत व्याख्या प्रस्तुत करती है। इससे आम लोगों को इस समस्या के बारे में गहराई से जानकारी मिलेगी।
पत्रकार जोशी छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में पिछले एक दशक से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। विमोचन कार्यक्रम का संचालन पूर्व प्रधानाचार्य डा. विपिन शाह ने किया। इस अवसर पर अनिल जोशी, दिनेश तिवारी, मनोज पांडे, पुष्पेश पांडे, नरेश तलरेजा, वृंदा पंत, हिमांशु उपाध्याय, पत्रकार जोशी के बड़े भाई और एपीएस के प्रधानाचार्य कमलेश जोशी, प्रो. जया पांडे, जोगेंद्र बिष्ट, चयनिका शाह, प्रभात मेहरा, राजेंद्र पंत, खजान जोशी सहित तमाम लोग मौजूद थे।