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महालक्ष्मी को बहुत प्रिय है गन्ना

Sat, 29 Oct 2016 10:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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पहाड़ में दीपावली पर गन्ने की पूजा का विशेष महत्व है। गन्ने से ही महालक्ष्मी की मूर्ति तैयार की जाती है। हिंदू धर्म के जानकारों के मुताबिक मां लक्ष्मी को गन्ना बहुत प्रिय है। उनके भोजन में गन्ना भी शामिल है। गन्ने को औषधि का द्योतक भी माना जाता है। इसी कारण दीपावली के दिन गन्ने की पूजा होती है। 
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कुमाऊं के पहाड़ी अंचल में अधिकांश स्थानों पर दीपावली पर्व पर गन्ने की पूजा का भी विधान है। लोग मंदिर में गन्ने को रखकर पूजा करते हैं। इस दिन लोग गन्ने के तने को काटकर उसके टुकड़ों से मां लक्ष्मी की मूर्ति का निर्माण करते हैं। गन्ने से मूर्ति का ढांचा तैयार करके उसमें देवी का मुखौटा लगाया जाता है। फिर रंगवाली पिछौड़ा पहनाकर उसका श्रंगार करते हैं। सुहागिन महिलाएं अपने स्वर्णाभूषण भी इस मूर्ति को पहनाते हैं। फिर मूर्ति को प्रतिष्ठित करके उसकी पूजा की जाती है। 

आचार्य मोहन चंद्र पंत पुराणों का उल्लेख करते हुए बताते हैं कि मां लक्ष्मी को गन्ना बहुत प्रिय है। उनके भोजन में गन्ना भी शामिल है। यह भी मान्यता है कि लक्ष्मी का जन्म इक्षु सागर से हुआ। इक्षु सागर का जल मीठा था। संस्कृत में इक्षु का अर्थ गन्ना है। इस वजह से भी मां लक्ष्मी की मूर्ति गन्ने से बनाई जाती है अथवा उनके प्रतीक के रूप में गन्ने का पूजन होता है। आचार्य पंत के मुताबिक लक्ष्मी के पूजन के बाद मूर्ति निर्माण में प्रयोग में लाए गए गन्ने को नदी अथवा कहीं अन्य जगह पानी में विसर्जित किया जाना चाहिए और सिर्फ गन्ने के तने का पूजन किया हो तो उसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। पहाड़ में गन्ने की खेती नहीं होती, लेकिन अनेक लोग घर के आसपास की क्यारी में गन्ना बोते हैं। यह गन्ना इसी दिन पूजा के लिए उपयोग में लाया जाता है। दीपावली में महालक्ष्मी की पूजा के लिए मैदानी इलाके से भी गन्ना पहाड़ में बिकने को आता है। 
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