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 स्कूल नहीं आते मास्साब, बच्चों की देखरेख को एक महिला रख दी

Sat, 21 Apr 2018 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो   मौलेखाल (अल्मोड़ा)।
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राज्य में सरकारी शिक्षा व्यवस्था किस हालत में है इसका नमूना सल्ट ब्लॉक के दूरस्थ गांव आसूतले में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में देखा जा सकता है। इस स्कूल में तैनात मास्साब हमेशा स्कूल से गायब रहते हैं। उन्होंने अपने स्तर से विद्यालय में दो हजार रुपये प्रति माह मानदेय पर गांव की एक महिला को स्कूल की देखरेख के लिए रखा है। ग्रामीणों ने एक बारात में हिस्सा लेने पहुंचे जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत को इस विद्यालय की दशा से अवगत कराया।

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जिला पंचायत सदस्य ने तत्काल एसडीएम को फोन पर सूचना दी और एसडीएम के निर्देश पर क्षेत्रीय पटवारी ने विद्यालय में पहुंचकर जांच की। पटवारी के पहुंचने पर भी वहां सिर्फ शिक्षक द्वारा तैनात की गई महिला ही मौजूद पाई गई।  मास्साब ही नहीं भोजन माता और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भी गायब मिले। 

जानकारी के मुताबिक प्राथमिक पाठशाला आसूतले में बीते काफी समय से अव्यवस्था चल रही है। सड़क से पांच किमी दूर स्थित इस विद्यालय में सिर्फ छह बच्चे पढ़ते हैं और वहां तैनात एक मात्र शिक्षक भी ज्यादातर विद्यालय नहीं आते। ग्रामीणों ने गांव में एक बारात में पहुंचे जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत से इस बारे में शिकायत की।  लोगों ने बताया कि वहां कार्यरत शिक्षक ने विद्यालय खोलने, बंद करने और बच्चों की देखरेख के लिए गांव की एक महिला को रखा है।
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इंटर तक पढ़ी इस महिला को शिक्षक अपनी ओर से दो हजार रुपये प्रतिमाह मेहताना देते हैं। शिकायत मिलने के बाद जिला पंचायत सदस्य रावत सुबह स्कूल पहुंचे तो वहां शिक्षक के अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और भोजन माता भी अनुपस्थित थे। उन्होंने फोन से इसकी सूचना एसडीएम गौरव चटवाल को दी। इस पर एसडीएम ने तुरंत क्षेत्रीय पटवारी उमेश चंद्र को जांच के लिए भेजा तो शिकायत सही पाई गई। वहां मध्याह्न भोजन भी नहीं पका था। 

 बताया गया है कि उस वक्त शिक्षक द्वारा व्यक्तिगत तौर पर तैनात की गई महिला ही मौजूद मिली। लोगों का कहना था ककि शिक्षक भुवन चंद्र जोशी ने अनीता देवी को 18 दिसंबर 2017 से रखा है। ग्रामीणों के मुताबिक शिक्षक कभी-कभी स्कूल आते हैं। इधर 18 अप्रैल से वह स्कूल नहीं आए हैं, लेकिन शनिवार को इस मामले की भनक लगने पर वह करीब पौने ग्यारह बजे विद्यालय पहुंच गए। मास्टर साहब ने खुद भी स्वीकार किया कि उनका घर स्कूल से काफी दूर है।

जिससे वह समय पर नहीं पहुंच पाते। इसी कारण उन्होंने स्कूल खोलने के लिए एक महिला को रखा है। इधर क्षेत्रीय पटवारी ने अपनी रिपोर्ट एसडीएम को भेज दी है। एसडीएम गौरव चटवाल ने बताया कि मामले की जांच के बाद आगे कार्रवाई की जाएगी।    

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