अल्मोड़ा। नगर में स्थित नंदादेवी मंदिर लोगों की अपार आस्था का केंद्र हैं। इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन को आते हैं। मान्यता है कि मां के दरबार में भक्तों द्वारा मांगी गई मन्नतें पूरी होती हैं।
जानकारी के अनुसार 1670 में बाज बहादुर चंद बधानगढ़ से नंदादेवी की स्वर्ण प्रतिमा अल्मोड़ा लाए थे। 1699 में राजा ज्ञानचंद भी बधानकोट से एक स्वर्ण प्रतिमा अल्मोड़ा लाए। 1710 में राजा जगत चंद को बधानकोट विजय के अवसर पर नंदादेवी की प्रतिमा प्राप्त नहीं हुई। जिसके बाद उन्होंने अपने खजाने से 200 अशर्फियों को गलाकर नंदादेवी की प्रतिमा का निर्माण कराया और इन्हें मल्ला महल स्थित नंदादेवी मंदिर में प्रतिष्ठित कराया।
जिस परिसर में वर्तमान नंदादेवी मंदिर स्थित है वहां पर 1690-91 में तत्कालीन नरेश उद्योत चंद ने दो शिव मंदिर उद्योत चंद्रेश्वर और पार्वती चंद्रेश्वर बनाए। अंग्रेजी शासनकाल में 1815 में तत्कालीन कमिश्नर ट्रेल ने उन्हें उद्योत चंद्रेश्वर मंदिर में रखवा दिया। इसके बाद कमिश्नर ट्रेल उनकी आंखों की रोशनी अचानक काफी कम हो गई। कुछ लोगों की सलाह पर उन्होंने अल्मोड़ा आकर 1816 में नंदादेवी का मंदिर बनवाकर (वर्तमान मंदिर) वहां नंदादेवी की मूर्ति स्थापित कराई। उसके बाद उनके आंखों की रोशनी में लौट आई।