फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शराब बंदी, शिक्षा को समर्पित रहा सरला बहन का जीवन

Wed, 04 Apr 2018 11:05 PM IST
महेश पाठक 
विज्ञापन
सरला बहन - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

सात समुंदर पार से आकर भारत को अपनी कर्मभूमि बनाने वाली सरला बहन की पांच अप्रैल को 118 वीं जयंती मनाई जाएगी। सरला ने पर्यावरण, महिला सशक्तीकरण और बालिकाओं को बुनियादी शिक्षा देने के लिए भारत में व्यापक अभियान चलाया।

विज्ञापन


विनोबा भावे के भूदान, ग्रामदान आंदोलन से जुड़ी रही सरला बहन का जीवन महिला शिक्षा, बाल शिक्षा, शराब बंदी को समर्पित रहा। सरला बहन ने अपने जीवन में 22 पुस्तकें लिखीं। इनमें से दो पुस्तकें संरक्षण या विनाश, वन और मानव किताबें धरमघर में लिखी। 

पांच अप्रैल 1901 को इंग्लैंड में जन्मी मिस कैथरीन हाइलामैन गांधी जी से प्रभावित होकर 1932 में भारत आईं थीं। इसके बाद आठ साल तक बापू के सानिध्य में रहीं। उनके सामाजिक कार्यों से प्रभावित होकर गांधी जी ने उन्हें सरला नाम दिया। गांधी जी के आदेश पर सरला बहन ने महाराष्ट्र के सेवाग्राम में आश्रम स्थापित किया।
विज्ञापन


1941 में स्वास्थ्य खराब होने पर गांधी जी ने उन्हें अल्मोड़ा के चनौदा स्थित आश्रम में रहकर समाज सेवा करने को कहा। 1946 में सरला बहन आश्रम संचालक शांति लाल द्विवेदी के साथ पहाड़ के भ्रमण पर निकलीं। उन्होंने मिलम तक पैदल यात्रा की। 1947 में कौसानी में लक्ष्मी आश्रम की स्थापना कर बालिकाओं को शिक्षा देने का काम शुरू किया।

वर्ष 1975 में धरमघर पहुंचकर यहां पर हिमदर्शन कुटीर की स्थापना की। उनके सामाजिक कार्यों को देखते हुए सरकार ने 1978 में उन्हें जमुना लाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्होंने पुरस्कार में मिली एक लाख रुपये की धनराशि समाजसेवा में खर्च कर दी। आठ जुलाई 1982 को उनका देहांत हो गया।

आश्रम में आज होंगे कार्यक्रम 

सरला बहन की 118वीं जयंती पर धरमघर स्थित हिमदर्शन कुटीर में विभिन्न कार्यक्रम होंगे। सुबह 8.30 बजे हवन होगा। सर्वधर्म प्रार्थना एवं श्रद्धांजलि सभा होगी। इसमें कौसानी, लक्ष्मी आश्रम, अनाशक्ति आश्रम के अलावा दिल्ली, पिथौरागढ़, बेरीनाग आदि स्थानों से लोग आएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें