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आतंक का पर्याय बने आदमखोर का अंत

Fri, 26 Feb 2016 10:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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 क्षेत्र में आतंक का पर्याय बना आदमखोर तेंदुआ शिकारियों की गोली से ढेर हो गया है। बृहस्पतिवार की रात महाकालेश्वर में एक शिकारी की गोली से घायल होकर मेहलचौरा में एक खंडहर में दुबके तेंदुए को शुक्रवार को दोपहर दूसरे शिकारियों की टीम ने तीन राउंड गोलियां चलाकर ढेर कर दिया। तेंदुए के पंजों के निशान आदि के आधार पर विभाग ने तेंदुए के आदमखोर होने की बात कही है।  
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चौखुटिया के मैहलचौरा में शुक्रवार को दोपहर करीब सवा बारह बजे आदमखोर तेंदुआ ढेर हो गया है। मारे गए तेंदुए की उम्र चौदह साल, लंबाई ढाई मीटर तथा ऊंचाई 80 सेमी बताई गई है। गौरतलब है कि तेंदुए ने 8 फरवरी को इसी गांव में भूपाल सिंह को अपना शिकार बनाया था।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बृहस्पतिवार की रात करीब दस बजे महाकालेश्वर में तेंदुआ बैरती निवासी शिकारी हरीश आर्या पर झपट पड़ा उनके द्वारा चलाई गई गोली से तेंदुआ घायल होकर भाग गया था। बताया गया कि वन विभाग की टीम शुक्रवार सुबह से ही तेंदुए को ढूंढने में जुटी थी। इस दौरान मेहलचौरा में कार्य कर रहे कुछ श्रमिकों के माध्यम से सूचना मिली की तेंदुआ गांव में एक खंडरनुमा पुराने मकान के अंदर दहाड़ रहा है सूचना मिलने पर वन कर्मियों के साथ पहुंचे शिकारी लखपत सिंह और सहायक शिकारी धनसिंह ने मकान के ठीक सामने मोर्चा संभालते हुए दूसरे मकान में चढ़कर तेंदुए पर तीन गोलियां दागी जिससे तेंदुआ वहीं ढेर हो गया।
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वन क्षेत्राधिकारी भूपाल सिंह बिष्ट ने बताया कि मारे गए तेंदुए के पंजे के निशान आदि के आधार पर तेंदुए के आदमखोर होने के स्पष्ट प्रमाण हैं। तेंदुए का एक दांत भी टूटा है।  बाद में तेंदुए का रेंज कार्यालय द्वाराहाट में पोस्टमार्टम किया गया। इस मौके पर वन क्षेत्राधिकारी भूपाल सिंह बिष्ट, तहसीलदार दीवानसिंह बिष्ट, जीवन अधिकारी, खुशाल अटवाल, चंद्रशेखर त्रिपाठी, बहादुर सिंह, कृपालसिंह आदि मौजूद थे।
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