सोमेश्वर तहसील के अंतर्गत सोनकोटुली गांव में रात में जीर्ण-शीर्ण मकान के गोठ में एक तेंदुआ घुस गया और वहां से बाहर नहीं निकल पाया। तड़के तीन बजे शौच को जा रहे ग्रामीण ने मकान के भीतर तेंदुए की आंखें चमकते हुए देखी। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन कमियों ने करीब ढ़ाई बजे ट्रेंकुलाइज कर तेंदुए को बेहोश कर पिंजरे में कैद कर दिया। वन कर्मी तेंदुए को रेस्क्यू सेंटर एनटीडी ले आए हैं। पकड़े गए नर तेंदुए की उम्र करीब 10 से 12 साल है।
गांव की प्रधान चंपा देवी और राजेंद्र सिंह सेलदार का गांव के मध्य में संयुक्त पुस्तैनी जीर्ण-शीर्ण मकान है। मकान में कोई नहीं रहता है। इस मकान के गोठ में रात में एक तेंदुआ घुस गया। तड़के करीब तीन बजे शौच के लिए जा रहे राजेंद्र सिंह ने मकान के गोठ में तेंदुए की आंखें चमकती देखीं। उन्होंने शोर मचाया और ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए। तेंदुआ रात में ठाकुर सिंह के मुर्गी बाड़े को तोड़कर तीन मुर्गियां मारकर गोठ में ले गया था।
उजाला होने पर ग्रामीणों ने वन विभाग को गांव में मकान में तेंदुआ घुसने की सूचना दी। अल्मोड़ा से वन कर्मियों की टीम दिन में एक बजे गांव में पिजरा लेकर पहुंची। इसके बाद वन कर्मियों ने एक ओर से मकान की दीवार तोड़ी। करीब डेढ़ घंटे बाद प्रभारी वन क्षेत्राधिकारी केवलानंद पांडे ट्रेंकुलाइजर गन से तेंदुए को बेहोश करने में सफलता पाई।
वन क्षेत्राधिकारी मोहन राम आर्या ने बताया कि पकड़े गए नर तेंदुए की उम्र करीब दस से बारह साल के बीच है।
तेंदुआ करीब सात फीट लंबा है। तेंदुए के आगे के दाएं पैर के पंजे में घाव है। तेंदुआ होश में आ गया है। रेस्क्यू सेंटर में उसका उपचार किया जा रहा है। स्वस्थ होने पर तेंदुए को जंगल में छोड़ दिया जाएगा। तेंदुए को पकड़ने वाली वन कर्मियों की टीम में वन दरोगा मदन मोहन पांडे, वन रक्षक राजेंद्र कांडपाल, त्रिलोक सिंह, जीत सिंह रावत हीरा सिंह बिष्ट, किशोर लाल, संतोष सिंह, जीत सिंह रावत आदि शामिल थे।