अल्मोड़ा। लमगड़ा ब्लॉक के पौधार से लगे आबादी वाले क्षेत्र के जंगल में रविवार को एक तेंदुआ बांज के पेड़ की दो टहनियों के बीच में फंस गया। छोटे बच्चे घूमने निकले तो तेंदुए के दहाड़ने पर उनकी नजर पेड़ में फंसे तेंदुए में पड़ गई। बच्चों के झुंड को देखकर तेंदुआ और जोर-जोर से दहाड़ने लगा।
तेंदुए के गुर्राने की आवाज सुनकर बच्चे भयभीत हो गए और उन्होंने शोर मचा लिया। शोर सुनकर मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर विभाग की टीम मौके पर पहुंची। वन कर्मियों ने तेंदुए को ट्रेंकुलाइज कर पिंजरे में कैद कर लिया है। संभावना है कि जंगली मुर्गी का शिकार करने के लिए तेंदुए ने छलांग लगाई और बांज के पेड़ की टहनियों के बीच में फंस गया।
रविवार शाम लमगड़ा ब्लॉक के पौधार से लगे आबादी वाले क्षेत्र से कुछ दूरी पर जंगल में एक तेंदुआ बांज के पेड़ की दो टहनियों के बीच में फंस गया। छोटे बच्चे वहां से कुछ दूरी पर गुजर रहे थे तो उन्होंने तेंदुए की दहाड़ सुनी। इससे भयभीत होकर बच्चों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने तेंदुए के पेड़ में फंसने की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी।
सूचना मिलने के बाद रेंजर केवल पांडे, जागेश्वर के रेंजर मनोज सनवाल के नेतृत्व में वन कर्मी पिंजरा और ट्रेंकुलाइजर गन लेकर मौके पर पहुंचे। वन कर्मियों ने तेंदुए को ट्रेंकुलाइज कर पिंजरे में कैद कर लिया है। रेंजर केवल पांडे ने बताया कि पकड़े गए नर तेंदुए की उम्र करीब छह से सात साल है। तेंदुआ स्वस्थ है। होश आने पर रात में ही तेंदुए को दूरस्थ क्षेत्र के जंगल में छोड़ा दिया जाएगा। वन कर्मियों की टीम में सुधांशु जोशी, अनिल कुमार, हेम कांडपाल, दयाकृष्ण लोहनी आदि थे।
अल्मोड़ा। लमगड़ा ब्लॉक के पौधार, सिरखोड़ा, असोटा, अनरियाकोट, पलना, बाना, गुना, टमटयूड़ा गांवों में लंबे समय से तेंदुए का आतंक है। तेंदुआ दिन के समय ही आबादी वाले क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। पौधार निवासी हिम्मत सिंह बिष्ट ने बताया कि तेंदुआ कई ग्रामीणों की मवेशियों को निवाला बना चुका है। उन्होंने बताया कि कई बार तेंदुआ ग्रामीण पर हमला कर उन्हें निवाला बनाने की कोशिश कर चुका है। 18 अक्तूबर 2012 में सिरसोड़ा निवासी उप प्रधान को तेंदुए ने मार दिया था।