भिकियासैंण (अल्मोड़ा)। स्याल्दे ब्लॉक के बरंगल गांव के किमबगड़ तोक में तेंदुए ने 50 वर्षीय महिला को मार डाला। महिला तीन दिन से लापता थी। बुधवार को उसका क्षत विक्षत शव गांव से 200 मीटर दूर झाड़ियों में बरामद हुआ। जौरासी के रेंजर मोहन राम आर्य ने आशंका जताई कि पूर्व में आदमखोर घोषित तेंदुए ने ही महिला को अपना शिकार बनाया होगा। घटना से बरंगल समेत आसपास के गांवों के लोग दहशत मेें हैं।
किमबगड़ तोक निवासी शांति देवी (50) घर पर अकेले रहती थी। वह तीन दिन से लापता थी।
ग्रामीण उसकी ढूंढखोज में लगे थे। महिला के घर के आसपास तेंदुए के पंजों के निशान भी देखे गए। बुधवार को ग्रामीणों और उप वन क्षेत्राधिकारी हेम चंद्र आर्य के नेतृत्व में टीम ने महिला की फिर खोजबीन की तो घर से करीब दो सौ मीटर दूर झाड़ियों में महिला का क्षत विक्षत शव बरामद हुआ। सूचना पर राजस्व पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। 108 एंबुलेंस से महिला का शव सीएचसी देघाट लाया गया, जहां रानीखेत से पहुंची डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। सूचना पर तहसीलदार भिकियासैंण निशा रानी, कानूनगो शंकर गिरि, राजस्व एसआई धीरज कुमार, रेंजर मोहन राम आर्य भी अस्पताल पहुंचे। पोस्टमार्टम के बाद शव ग्रामीणों को सौंप दिया गया। ग्रामीणों ने तहसीलदार और रेंजर से तेंदुए से शीघ्र निजात दिलाने की मांग की। वन विभाग की टीम क्षेत्र में गश्त कर रही है।
बिजनौर से एक और शिकारी बुलाया
भिकियासैंण। आदमखोर घोषित तेंदुए को मारने के लिए क्षेत्र में पहले से ही एक शिकारी तैनात है। विभाग ने अब बिजनौर से एक और शिकारी को बुलाया है। रेंजर मोहन राम आर्य ने बताया कि बिजनौर से शिकारी रात तक क्षेत्र में पहुंच जाएगा। (संवाद)
घटना स्थल पर लगाया पिंजरा
भिकियासैंण। आदमखोर तेंदुए को पकड़ने के लिए क्षेत्र में पिंजरा लगाया गया है। महिला को शिकार बनाने के बाद वन विभाग ने घटनास्थल के समीप पिंजरा लगा दिया है। ग्रामीणों ने भी डीएम से तेंदुए के बढ़ते आतंक से छुटकारा दिलाने की मांग की है। (संवाद)
तेंदुए के आतंक से गांव में रहना मुश्किल हो गया है। शाम ढलते ही तेंदुए के भय से लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। महिलाएं अकेले चारा, जलौनी लकड़ी लेने जंगल नहीं जा रहीं हैं। तेंदुए के बारे में वन विभाग के अधिकारियों को कई बार बताया गया लेकिन अब तक तेंदुआ नहीं पकड़ा गया है। तेंदुए को जल्द पकड़ा जाए। - देवेंद्र सिंह, बरंगल
तेंदुए के आतंक से रात काटनी मुश्किल हो रही है। दिन में भी भय बना रहता है। अकेले राह चलने पर लोग अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। तेंदुआ कई बार झाड़ियों में छिपा रहता है और मौका पाते ही लोगों पर हमला कर देता है। इस कारण शाम होते ही लोग आवाजाही करने में कतरा रहे है। खासकर छोटे बच्चों के अकेले खेलने या अन्यत्र जाने में उनकी जान को खतरा बना रहता है। तेंदुए को जल्द पकड़ा जाना चाहिए। - विजय बंगारी, बरंगल