चमड़खान में तेंदुए की दस्तक से क्षेत्रवासियों में दहशत फैल गई। सौनी, देवलीखेत, डौड़ाखाल, पंतगांव, चमड़खान आदि स्थानों पर अब तक वह 12 से अधिक मवेशियों को मार चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि तेंदुआ कई बार आबादी क्षेत्र तक आ गया। दहशतजदा ग्रामीणों ने मवेशियों को जंगल भेजना भी बंद कर दिया है।
सिलोर घाटी में भी तेंदुए का आतंक छाया हुआ है। अभिभावक बच्चों को अकेले स्कूल भेजने से डर रहे हैं। पूर्व बीडीसी चंदन बिष्ट ने कहा कि वन विभाग को मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। साथ ही जिन लोगों के मवेशियों को निवाला बनाया उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए। इधर, जालली क्षेत्र के मासों, धमेड़ा आदि क्षेत्रों में भी तेंदुए की दस्तक से लोग भयभीत हैं।
पूर्व प्रधान सुरेश चंद्र टम्टा ने बताया कि इस क्षेत्र में वह 12 से अधिक बकरियों को जंगल में ही मार चुका है। वन विभाग को अतिशीघ्र पिंजरा लगाना चाहिए।