निकटवर्ती खड़खेत गांव के जंगल में मादा तेंदुए का शव बरामद हुआ है। साढ़े तीन वर्षीय तेंदुए का शव तीन दिन पुराना है। गांव की महिलाओं की सूचना पर वन विभाग के कर्मचारियों ने शव कब्जे में लेकर यहां गनियाद्योली रेंज कार्यालय परिसर में पोस्टमार्टम कर उसे जला दिया। पशु चिकित्सकों का कहना है शायद निमोनिया बीमारी के कारण तेंदुए की मौत हुई है।
जानकारी के अनुसार खड़खेत गांव के जंगल के सूखे नाले में तेंदुए का शव पड़ा हुआ था। बृहस्पतिवार की शाम महिलाएं घास काटकर लौट रही थीं। इसी बीच नाले में तेंदुआ दिखा, डर के मारे महिलाएं घास की गठरियां मौके पर छोड़कर घर भाग आई। इसके बाद वन विभाग को सूचना दी गई।
बीहड़ जंगल के कारण रात में शव की खोज नहीं हो पाई। सुबह विभाग के कर्मचारी दोबारा जंगल में गए तो नाले में शव पड़ा मिला जिसे गनियाद्योली लाया गया। रेंजर दीवानी राम ने बताया कि शव के सभी अंग सुरक्षित हैं।
ताड़ीखेत के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सीएस करगेती और बग्वालीपोखर के डॉ. ओमप्रकाश के पैनल ने शव का पोस्टमार्टम किया। डॉक्टरों ने बताया कि शव तीन दिन पुराना है, आशंका है अत्यधिक ठंड लगने के कारण निमोनिया हो गया और तेंदुए की मौत हो गई।
अर्जुनराठ समेत अन्य गांवों में पिछले काफी समय से तेंदुए का आतंक बना हुआ है। वह कई मवेशियों को शिकार बना चुका है, दिन ढलते ही गांवों के आसपास तेंदुए कि दहाड़ सुनाई दे रही हैं। लोगों में दहशत है और अंधेरा होते ही लोग घरों में दुबक रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए के आतंक से निजात के लिए क्षेत्र में पिंजरा लगाने की मांग की है।