पहाड़ की लड़कियां अब परिवार की जिम्मेदारियों और परिस्थितियों को देखते हुए झिझक छोड़कर हर चुनौती स्वीकार करने को तैयार हैं। बिंता निवासी ममता बिष्ट ने भी सेवा के दौरान पिता की मौत हो जाने पर रोडवेज में परिचालक की नौकरी स्वीकार की और पिछले नौ माह से बखूबी अपनी ड्यूटी कर रही हैं।
द्वाराहाट अंतर्गत ग्राम पंचायत बिंता निवासी ममता बिष्ट (पहले ममता कैड़ा) के पिता मोहन सिंह कैड़ा परिवहन निगम के काठगोदाम डिपो में चालक थे। सेवाकाल के दौरान निधन होने पर बतौर मृतक आश्रित ममता की सितंबर 2014 में परिचालक के पद पर नियुक्ति हुई।
शिक्षा शास्त्र से एमए ममता बताती हैं कि एमए करने के बाद वह हल्द्वानी में किसी निजी संस्थान में कंप्यूटर आपरेटर के रूप में कार्यरत थीं। उसी बीच पिता का निधन होने पर पैदा हुए हालातों ने उसे परिचालक बना दिया। वह दिल्ली-गनाई बस में रानीखेत से चौखुटिया फिर वापस रानीखेत तक की ड्यूटी करती हैं।
वह हर रोज पूरे उत्साह से अपना कार्य करती हैं। कहती हैं कि वह लंबी दूरी के सफर में जाने को भी तैयार हैं। रोडवेज में कार्यरत सहकर्मी बताते हैं कि ममता काफी मिलनसार और सहयोगी स्वभाव की हैं। बुजुर्ग और विकलांग यात्रियों का विशेष ध्यान रखती हैं। अपने कुशल व्यवहार के चलते ही विभाग में उसका बड़ा सम्मान है।