अल्मोड़ा। वन भूमि की स्वीकृति समय से न मिलने का बुरा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है। मुख्यमंत्री की घोषणा के दस साल बाद भी 28 किमी लंबे क्वारब-पेटशाल सड़क का निर्माण नहीं हो पाया है। सरकार ने सड़क के लिए पूर्व में 9.80 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए हैं। सड़क न बन पाने से सुयाल घाटी क्षेत्र के दर्जनभर गांवों के लोगों को यातायात सुविधा नहीं मिल पा रही है।
अल्मोड़ा शहर की सड़कों पर यातायात का दबाव कम करने के लिए एक दशक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने क्वारब-पेटशाल बाइपास सड़क के निर्माण की घोषणा की थी। सरकार ने तब सड़क के निर्माण के लिए 9.80 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए हैं। इस सड़क के बनने से सरसों, खगमरा, मालगांव, जैंगल, सिकुड़ा, फलसीमा, सिराड़ समेत करीब एक दर्जन गांवों को यातायात सुविधा का लाभ मिलना है। इन गांवों में सब्जी का बहुतायत में उत्पादन होता है, लेकिन यातायात सुविधा के अभाव में लोगों को दो से तीन किमी पैदल चलना मजबूरी है। सब्जी के विपणन के लिए लोगों को पैदल ही अल्मोड़ा बाजार आना पड़ता है। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। यह सड़क बनने से अल्मोड़ा शहर की सड़कों से यातायात का दबाव कम होता और पिथौरागढ़, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, दन्यां, धौलछीना, बाड़ेछीना, लमगड़ा, शहरफाटक की ओर जाने वाले वाहनों को अल्मोड़ा शहर में आने की जरूरत नहीं पड़ती। लोनिवि प्रांतीय खंड के ईई विजय कुमार ने बताया कि सड़क को वन भूमि की स्वीकृति नहीं मिली है। इसी कारण सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।